भगतमाल़ – छंद त्रिभंगी – ब्रह्मदास जी बीठू माड़वा
।।छंद – त्रिभंगी।।
ईसर उठ भग्गा, धोमर अग्गा, बेवै नग्गा, लग बग्गा।
हुय नार सुहग्गा, मिल़ियौ मग्गा, दाणव पग्गा, रच दग्गा।
ललचायौ ठग्गा, नाचण लग्गा, सीस करग्गा, विणसंतू।
धिन हो दुख वारण, काज सुधारण, भगत उधारण भगवन तू।
जिय भगतां तारण भगवन तू।।१[…]