मेट आरत मेह कर
।।छंद – सारसी।।
बरखा बिछोही शुष्क रोही,
और वोही इण समैं।
मघवा निमोही बण बटोही,
हीय मोही लख हमैं।
बलमा बिसारी धण दुखारी,
जीव भारी कष्टकर।
पत राख सुरपत दर बिसर मत,
मेट आरत मेह कर।
जिय देर मत कर मेह कर।[…]
Charan Community Portal
।।छंद – सारसी।।
बरखा बिछोही शुष्क रोही,
और वोही इण समैं।
मघवा निमोही बण बटोही,
हीय मोही लख हमैं।
बलमा बिसारी धण दुखारी,
जीव भारी कष्टकर।
पत राख सुरपत दर बिसर मत,
मेट आरत मेह कर।
जिय देर मत कर मेह कर।[…]
इतरो अनियाव मती कर इंदर,
डकरां ऐह नको रच दाव।
किथियै जल़ थल़ एकण कीधा,
सुरपत किथियै सूको साव।।1
जल़ बिन मिनख मरै धर जोवो,
सब फसल़ां गी सांप्रत सूक।
उथिये छांट नखी नह एको,
कानां नाय सुणी तैं कूक।।2[…]
थल़ सूकी थिर नह रह्यो, चित थारो चितचोर।
लीलां तर दिस लोभिया, मन्न करै ग्यो मोर।।1
लूवां वाल़ै लपरकां, निजपण तजियो नाह।
धोरां मँझ तज सायधण, रुगट गयो किण राह।।2
झांख अराड़ी भोम जिण, आंख खुलै नीं और।
वेल़ा उण मँझ वालमा, मोह तज्यो तैं मोर।।3
वनड़ी तज थल़ वाटड़ी, अंतस करा अकाज।
बता कियो तैं वालमा, की परदेसां काज।।4[…]
लालच ना जस लैण रो, चित न बडाई चाह।
आये नै दे आसरो, वाह तरव्वर वाह।।1
गहडंबर फाबै गजब, रल़ियाणो मझ राह।।
पथिक रुकै परगल़, छिंयां, वाह तरव्वर वाह।।2
विहँग सीस वींटा करै, उर ना भरणो आह।
दंडै नीं राखै दया, वाह तरव्वर वाह।।3
फूल तोड़ फल़ तोड़णा, पुनि सथ तोड़ पनाह।
उण पँछिया नै प्रीत दे, वाह तरव्वर वाह।।4[…]
।।गीत – वेलियो।।
परघल़ रूंख ऊगाय परमेसर, अवन बणाई ईस अनूप।
विलल़ा मिनख रूंख नैं बाढै, वसुधा देख करै विडरूप।।1
पँचरँग चीर धरा नैं परकत, हरियल़ हरि ओढायो हाथ।
मेला जिकै मानवी मन रा, गैला करै विटप सूं घात।।2[…]
।।छंद नाराच।।
वदे महीन मृदूबाक, काग ज्युं न कूक हे
बैसाख जेठ मास बीच ,लूर मोर सा लहे
सणंक सो करे सुवाज ,भादवे लुभावणी
जहो गुडोण जागरुक मारवाड तू मणी…..१[…]
।।छंद – नाराच।।
लगाय नेह लोयणां, उगाय रूंख ऐम तूं।
हमेस पोख हेर-हेर, पाल़ नित्त प्रेम तूं।
सनेह नीर सीचतां, मनां हरीत मोहणा।
बणै विरच्छ बोहरंग, सो सुरंग सोहणा।।१[…]
गरजा बादल गगन में,
घटा बनी घनघोर।
उमड़-घुमड़ कर छा गए,
अम्बुद चारों ओर।
सुन कर गर्जन समुद्र को,
आया क्रोध अपार।
मूढ़ मेघ किस मोद में,
गर्जन करत गंवार।।
मेरे जल से तन बना,
अन्य नहीं गुण एक।
मो ऊपर गर्जन करत,
लाज न आवत नेक।।[…]
।।छंद – सारसी।।
आषाढ घमघम धरा धमधम, वरळ चमचम वीजळी,
जीय वरळ चमचम वीजळी।।
गडहडिय सज दळ, आभा वळकळ, मंद प्रबळा मलकती,
दीपती खड खड, हसी नवढा, श्याम घुंघट छुपती;
अबळा अकेली, करत केली, व्योम वेली लळवळी,
आषाढ घमघम धरा धमधम, वरळ चमचम वीजळी,.
जीय वरळ चमचम वीजळी।।१[…]