गीत रायसिंह जी सान्दु रो – अनिरुद्ध सान्दू

।।गीत।।

अवनी आवे मनख अनेको, जलमे अर जावे जिम कीट।
भगत जलम ईल मोद भरत है, मेटण् आवे अघ नी मीट।।

सगति सुत सान्दु सहरावे, आयो रायसिंग इथ आज।
गीत तिहारा चहु दिस गाजे, कीधो जग थे चावो काज।।

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