चलना तेरा काम

पग-पग पर अवरोध मिलेंगे,
सुख-दुःख के युगबोध मिलेंगे।
विकट मोड़, गतिरोध मिलेंगे,
कुछ अनुनय अनुरोध मिलेंगे।
चलते जाना है तुमको बस, करके उन्हें प्रणाम। 1
जीवन पथ का तू राही मन!, चलना तेरा काम।।

» Read more

पिया घन बरसत अनराधार!

।।प्रोषितभर्तुका का पावस राग।।
।।गीत।।

उमड़ घुमड़ नभ बादल छाए, रिम झिम पड़ै फुहार!
बरछी भाला लगती तुम बिन, बारिश की बौछार!!
पिया! घन बरसत अनराधार!१

..

» Read more

सरस्वती वंदना

पंकज-लोचनि! ज्ञान-विरोचनि! हे तम-मोचनि! मां! वरदानी!
श्वेत-मराल बिराजत; छाजत बेद-सितार-कमंडलु-पानी!
नारद आदि विशारद-वंदित, ध्यावत है कवि-कोविद-ज्ञानी!
काव्य-सुधा सरसावन, पावन! दो मनभावन भाव भवानी!।।१।।

» Read more

सखि! घर आएँगे चितचोर

आँगन द्वारे कागा बोले, थिरक उठा मन-मोर!
सखि! घर आएँगे चितचोर!
खड़ी अटरिया राह निहारूँ, कब घर आवै कंथ?
मुख-थाली में नैन-दीप धर, तकूँ पिया का पंथ!
बंद पलक कर रखूँ सजन को, कर काजल की कोर!
सखि! घर आएँगे चितचोर!

» Read more

भव-पाश-विमोचन त्रिपुरारी-स्तवन

मस्तक बाल-मयंक लसै, शितिकंठ भुजंग-गले विषधारी।
अंग भभूत मसान मले, अवधूत दिगंबर स्वैरविहारी।
भूत-पिशाच-गणादि रखे संग, भेस अमंगल मंगलकारी।
पाहि! प्रभो! भव-पाश-विमोचन! त्राहि! त्रिलोचन हे त्रिपुरारी।।१।।

» Read more