गीत रायसिंह जी सान्दु रो – अनिरुद्ध सान्दू

गीत रायसिंह जी सान्दु (मिरगेसर) भगवान् ने होको पायो जिणरो

।।सोरठा।।

मोद करे मिरगेर, अवनी थूं भल आवियो।
फिरी ख्याति चहुँ फेर, रुड़ा लागो रायसिंह।।

भगत तिहारा भाव, अंतरजामी ओळखे।
आज उतालौ आव, होको पिवणने हरी।।

।।गीत।।

अवनी आवे मनख अनेको, जलमे अर जावे जिम कीट।
भगत जलम ईल मोद भरत है, मेटण् आवे अघ नी मीट।।

सगति सुत सान्दु सहरावे, आयो रायसिंग इथ आज।
गीत तिहारा चहु दिस गाजे, कीधो जग थे चावो काज।।

पावे नर माखण मिसरी पण, होका री मनवार कठे।
मुरत मांय राम ने नीमते, आयो पिवण नाथ अठे।।

सुण मनवार उठिया साँवळ, घर धणियाणी हाथ धरे।
तिरगुण नाथ जे पीओ तमाखु, माधव तव मरजाद मरे।।

भगत पुकारे आवो भूधर, खोटा बोल कहे मम खाखी।
आरत वाणी सुणत आवियो, रायसिंह वाळी पत राखी।।

पिधो होको कंत पदमजा, देखत खाखी रह गया दंग।
देव सुमन बरसावत दाखे, रंग राय तोहे बहु रंग।।

~~अनिरुद्ध सान्दू

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