भूल न करणी भूल
बोयां कांटा बापजी, फळै न लागै फूल
जगबरती नैं जाणतां, भूल न करणी भूल
भूल न करणी भूल, इयां मत काढ़ो आंटा
बणी बणाई बात, बिगड़सी बोयां कांटा।[…]
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बोयां कांटा बापजी, फळै न लागै फूल
जगबरती नैं जाणतां, भूल न करणी भूल
भूल न करणी भूल, इयां मत काढ़ो आंटा
बणी बणाई बात, बिगड़सी बोयां कांटा।[…]
हा रूप रूपळा रूंख रूंख री, डाळी डाळी हेत भरी।
हो हरियो भरियो बाग बाग में, बेल लतावां ही पसरी।
खिलता हा जिणमें फूल, फूल वै रंग रंग रा रळियाणां।
पानां पानां पर पंछीडा, मंडराता रहता मन भाणां।
बो बाग दिनो दिन उजड़ै है, सो कहो कठै फ़रियाद करां।
(म्हे) लिखां ओळमा अड़वाँ नैं, या खुद माळी सूं बात करां।।[…]
थारै मन री बात लाडेसर, म्हारै सूं अणजाणी के।
जे आँख्यां में पाणी ल्याऊं, भारत री छत्राणी के।
कन्त हजारी बाग जेळ में, बेटो जेळ बरेली में।
देवर जी जंगळ में भटकै, गोरा घुसिया हेली में।
जामाता जूझै गोरां सूं, सगळां मन में ठाणी के।
जे आँख्यां में पाणी ल्याऊं, भारत री छत्राणी के।[…]
जद बीज जमीं में गाडीज्यो,
अंतस अकुलायो दुख पायो।
बचबा रा गेला बंद देख
रोयो घबरायो पछतायो।
तद माटी उण सूं यूं बोली
रे बीज मती ना घबरावै।
जो जुड़ै जमीं सूं जड़ उणरी
कोई पण काट नहीं पावै।[…]
मज़दूरां री पीड़ पिछाणै इसड़ी आँख बणी ही कोनी
इण पीड़ा नै तोल दिखाद्यै इसड़ी ताक तणी ही कोनी
मज़दूरां री आ मजबूरी हर मजबूरी सूं मोटी है
म्हांरै चीज असंभव जग में, वा राम नहीं, बस रोटी है[…]
वैश्विक महामारी “कोरोना” से निजात पाने के लिए सभी अपने अपने स्तर से प्रयासरत हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान कर रहे हैं, राजनेता इस चुनौती का सामना करने के अनुरूप नीतियाँ बना रहे हैं, सरकारी कर्मचारी अथक प्रयास करके इन नीतियों को कार्य रूप में परिणित कर रहे हैं, व्यवसायी इस विषम परिस्थिति से जूझ रहे तन्त्र को आपदा राहत कोष में आर्थिक मदद कर रहे हैं, स्वयंसेवी संस्थाएं इस परिस्थिति के मारे अपार जन समुदाय को भोजन एवं रात्रि विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध करने की दिशा में जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है, चिकित्सक इस महामारी से संक्रमित मरीजों […]
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।।गीत – साणोर।।
उरड़ उण तार बिच बार करती ईदग।
बीसहथ लारली कार बगती।।
आंकड़े अखूं आधार इक आपरो।
सांकड़े सहायक धार सगती।।[…]
कुशल-क्षेम रह कुटुंब में, नेम-फेम नित-नित्त।
हरख-हेम हर घर हुवै, चैन-प्रेम हर चित्त।।
नव संवत्सर नेह रो, गेह-गेह ह्वै गान।
रोग देह सूं दूर रह, दखै एह गजदान।।
मही कोरोना मुक्त व्है, सुखी हुवै संसार।
अन्न-धन्न हर आँगणै, भरिया रहै भंडार।।[…]
साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली रै अनुवाद पुरस्कार 2019 सूं आदरीजण वाळी काव्यकृति ‘चारु वसंता’ मूळ रूप सूं कन्नड़ भासा रो देसी काव्य है, जिणरा रचयिता नाडोज ह.प. नागराज्या है। इण काव्य रो राजस्थानी भावानुवाद करण वाळा ख्यातनाम साहितकार है-डाॅ. देव कोठारी, जका आपरी इतियासू दीठ, सतत शोधवृत्ति अर स्वाध्याय प्रियता रै कारण माड़ भासा राजस्थानी रा सिरै साहितकारां में आपरी ठावी ठौड़ राखै। डाॅ. कोठारी प्राचीन राजस्थानी साहित्य, खास कर जैन साहित्य रा उल्लेखणजोग विद्वान है। हर काम नैं पूरी ठिमरता अर दिढता सूं अंजाम देवण री स्वाभाविक आदत रा धणी डाॅ. कोठारी ‘चारु वसंता’ काव्य रो उल्थौ ई घणै धीरज सूं कियो है।[…]
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