कमाल जिंदगी
मैं देख देख हो रहा निहाल जिंदगी,
कदम कदम पे कर रही कमाल जिंदगी।
वो गाँव जो कि टीबड़ों के बीच में बसा हुआ,
कि अंग अंग अर्थ के अभाव में फंसा हुआ।
अकाल पे अकाल सालोंसाल भाल-लेख ये,
कि कर्ज-कीच में हरेक शख्स था धंसा हुआ।
बेहाल में भी ना हुई निढ़ाल जिंदगी,
कदम कदम पे कर रही कमाल जिंदगी।[…]