साख रा सबद

‘दलित-सतसई’ श्री लक्ष्मणदान कविया री सद्य प्रकाशित काव्यकृति है। इणसूं पैली सतसई सिरैनाम सूं आपरी रूंख-सतसई, रुत-सतसई, मजदूर-सतसई अर दुरगा-सतसई (अनूदित) आद पोथियां छपी थकी है। दूहा छंद में सिरजी आ पोथी ‘दलित-सतसई’ आपरै सिरैनाम री साख भरती दलितां री दरदभरी दास्तान रो बारीकी सूं बखाण करै। कवि रो मानणो है कै मिनख मिनख सब अेक है पण मामूली स्वारथां रै मकड़जाळ में फंसियोड़ा मिनखां मिनखाचारै पर करारी मार मारी अर मिनखां में फांटा घाल दिया।[…]

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घड़ा लीवी पण जड़सी कुण

अेकर अेक गाम में कुत्तां री भरमार होगी। गळी-गळी में गंडकां रा टोळा फिरै। चावै जिकै घर में मौको लागतां ई गंडकां री डार आ बड़ै अर लाधै ज्यांनैं ई चट कर ज्यावै। लोगां आप आपरै घरां रै किंवाड़ लगा लिया। अेक दो आळसी हा बां ई दौरा-सौरा किंवाड़िया लगा’र गंडकां सूं गैल छुडावण रो जतन कर्यो। सगळै घरां रै किंवाड़ देखतां ई कुत्तां मिटिंग करी अर फैसलो लियो कै भाई अबै इण गाम में आपणी पार कोनी पड़ै। कठैई दूजी जाग्यां देखां।[…]

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સૂરજ ઝાકળ માં ઝડપાયો!

સૂરજ ઝાકળ માં ઝડપાયો!
રહ્યો ભાગતો કિંતુ બિચારો પરોઢિયે પકડાયો!

લાલ લ્હેરિયુ ઊષા લાડી નું ખેચ્યુતું ગઇ કાલે!
ને તમ તમતા મરચાં જેવા ભર્યા ચુંબનો ગાલે!
બિચારી ને પ્રેમ પિયાલો ‘ના’કહેતાં પણ પાયો![…]

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कोडमदेसर भैरुंजी रा छंद

।।छंद रोमकंद।।
थपियो थल़ मांय अनुप्पम थांनग,
छत्र मंडोवर छोड छती।
थल़वाट सबै हद थाट थपाड़िय,
पाट जमाड़िय बीक पती।
दिगपाल़ दिहाड़िय ऊजल़ दीरघ,
भाव उमाड़िय चाव भरै।
कवियां भय हार सदा सिग कारज,
कोडमदेसरनाथ करै।।1[…]

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ચકા રાણા -ચકી રાણી

અરે!બચપણ મહી મેં સાભળી તી એમની ક્હાણી;ચકા રાણા-ચકી રાણી!
ચકો થોડો હતો બુધ્ધુ ચકી થોડી હતી શાણી,ચકા રાણા-ચકી રાણી!
અને એ બેય મળતાં તા સતત આબા તણી ડાળે ;તા વાતો પ્રેમ ની કરતાં,
ચકી સંબોધતી “રાજા”ચકો સંબોધતો “રાણી”;ચકા રાણા-ચકી રાણી![…]

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बाळपणो बर-बर बतळावै – हेत-हथायां हमैं कठै

“छाती दुखै, गोडा दुखै; छाती दुखै, गोडा दुखै” इण ओळी नैं होळै-होळै बोलतां-बोलतां बां इयांकली गड़कै चाढ़ी कै आखती-पाखती बैठा लोगड़ां री बाक फाटगी। मूंढ़ै सूं आवाज निकाळणै रै साथै-साथै बै आपरै डील अर हाथ-पगां नैं ई इयां संचालित करै हा जाणै कोई सावचेती सूं कीं काम नैं सिग चाढ़तो हुवै। सगळा सोचण लाग्या डोकरां रै हुयो कांई ? अेको सांस “छाती दुखै, गोडा दुखै/छाती दुखै, गोडा दुखै/छाती दुखै, गोडा दुखै/छाती दुखै, गोडा दुखै/छाती दुखै, गोडा दुखै” री रुणकार अेक-डोढ मिनट ताणी इकसार लागती री। सुर होळै सूं तेज, और तेज, और तेज हुयो। छेवट अेकदम सूं रुणकार रुकगी, जाणै कोई “इमरजेंसी-ब्रैक” लाग्या हुवै।[…]

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દર્પણ

દર્પણ ગોરી ને અવલોકે!
શકે ન સ્પર્શી એ દુઃખ માં એ રડતુ પોકે પોકે!

ગોરી ના ગોરા ગાલો ને એય ચુમવા ચાહે રે!
અવઘિ દિવાલે અટવાયેલુ જલે વિરહ ના દાહે રે!
કરે વિનવણી સૌને ક્ષણ ભર તો મળવા દેશો કે!
દર્પણ ગોરી ને અવલોકે!
શકે ન સ્પર્શી એ દુઃખ માં એ રડતુ પોકે પોકે![…]

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Hello! હું તમને યાદ કરું છું! – ગઝલ

Hello! હું તમને યાદ કરું છું!
યાદ કરું છું!સાદ કરું છું!
છપ્પન ત્રણસો અડતાલીસ પર,
ક્ષણે ક્ષણે સંવાદ કરું છું!
Hello!કેમ છો?કુશળ ક્ષેમ છો!,
પ્રશ્નો નો વરસાદ કરું છું!
Hello ! તમારું નામ લઇ હું,
નિશદિન અંતરનાદ કરું છું![…]

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🌷घनाक्षरी कवित्त 🌷

कुंभा से कला प्रवीण, सांगा से समर वीर,
प्रणधारी पातळ की मात महतारी है।
प्रण हेतु परणी को चंवरी में छोड़ चले,
काळवीं की पीठ चढ़े पाबू रणधारी है।।
मातृभूमि की पुकार सुनिके सुहाग रात,
कंत हाथ निज सीस सौंपे जहां नारी है।
कर के प्रणाम निज भाग को सराहों नित,
रणबंकी राजस्थान मातृभू हमारी है।।01।।[…]

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गीत त्रिकुटबंध करनीजी रो

।।गीत-त्रिकुटबंध।।
इल़ रूप करनल आजरो
हिव जनम जय हिंगल़ाज रो
इम कोम किनियां करण ऊजल़, मेह रै महमाय।
अवतार करनल आपरो,
सुध भाग रँग सोयाप रो
सोयाप मुरधर रीत सुरधर
उमँग उरधर भाव भर-भर
कोड तर-तर होड कर-कर
गहक धुनिकर गीत घर-घर
सधर सज नर नार सरभर
गुमर हरदिस गहर मनभर
अमर फणधर उरस ऊतर
उछब अवसर रिधू अवतर पहर खुशियां पाय।।1[…]

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