कविराज श्री खूमदानजी बारहठ

भारतवर्ष की चारण काव्य महापुरुष परम्परा में कविराज श्री खूमदानजी बारहठ का नाम विशेष सम्मान और गौरव का प्रतीक है। कविराज श्री खूमदानजी बारहठ का जन्म पाकिस्तान के चारणवास ग्राम भीमवेरी, तहसील-नगरपारकर, जिला-थरपारकर, सिंध प्रदेश में दिनांक 08 फरवरी 1911, विक्रम संवत 1968 माघ शुक्ल द्वादशी, शुक्रवार को श्री लांगीदानजी बारहठ ( पुनसी बारहठ, मूल निवासी भादरेस, बाड़मेर) के घर हुआ था।

कविराज जन्म से ही प्रतिभा संपन्न बालक थे। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा तत्कालीन विख्यात संत श्री संतोषनाथजी के श्रीचरणों में सम्पूर्ण हुई थी। गुरु श्रीचरणों में आपको गुजराती, हिंदी एवं सिंधी भाषाओँ का ज्ञान प्राप्त हुआ। आपने अल्पायु में रामायण, गीता, महाभारत, चारों वेद, रघुनाथ रूपक, सत्यार्थ प्रकाश, रूपद्वीप पिंगल आदि प्रमुख धर्म ग्रंथो का विधिवत अध्ययन कर लिया था। गुरु अनुकम्पा एवं शाश्त्रों के गहन अध्ययन से आपके विचारों में परिपक्वता बढ़ी और आप काव्य रचना की और अग्रसर हुए।[…]

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प्रथम वर्षगांठ – www.charans.org

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नवरात्री स्थापना की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। आज का दिन एक और कारण से विशिष्ठ है क्योंकि गत वर्ष आज ही के दिन माँ भगवती की प्रेरणा से www.charans.org साईट का शुभारम्भ किया गया था। आज इसकी पहली वर्षगांठ है।
एक छोटा सा पौधा जो पिछले शारदीय नवरात्री स्थापना के दिन लगाया गया था, आज आप सभी के सहयोग एवं उत्साहवर्धन से निरंतर प्रगती कर रहा है। कुछ तथ्य प्रस्तुत हैं:

  • पिछले एक वर्ष में विश्व भर से इस साईट के अलग अलग पेज को ७३७८५ बार देखा गया|
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चारणों के विभिन्न ऑनलाइन ग्रुप (Websites, Facebook, WhatsApp, Twitter इत्यादि)

सभी एडमिन बंधुओं से निवेदन है कि चारणों से सम्बंधित अपने फेसबुक/व्हाट्सएप ग्रुप/पेज या वेबसाइट को इस लिस्ट में जुडवाने के लिए अपनी डिटेल्स admin@charans.org पर ईमेल करें| WhatsApp Groups **मोबाइल नंबर जानने के लिए admin@charans.org पर मेल द्वारा संपर्क करें। यदि आप अपना मोबाइल नम्बर यहाँ परमानेंट दिखाना चाहते हें तो ग्रुप एडमिन उक्त मेल पर अपनी सहमती दें। Facebook Groups/Pages Note: Only those groups / pages are eligible which are publicly visible and have at least 500 members or likes. www.charans.org (Group) / www.charans.org (Page) Old Boys Association Charan Hostel Udaipur अखिल भारतीय चारण दर्पण Charan Group (Admin Shri […]

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काव्यमय कुमकुम पत्रिका

कवि नरपत आसिया “वैतालिक” का विवाह ११ दिसंबर १९९९ को सांबरडा गुजरात में सुखदेव सिंह जी रामसिंह जी गढवी की सुपुत्री लता(चेतना) से हुआ। आपका गांव खाण और पारिवारिक नाम नरेश है। पिताजी का नाम आवडदानजी है। नरपत जी चाहते थे कि उनकी शादी की कुमकुम पत्री काव्यमय हो इसी आशय से उन्होंने अपने नाना श्री अजयदान जी लखदान जी रोहडिया मलावा जो स्वयं अपने जमाने के एक सम्मानित कवि रहे हैं  आग्रह किया कि वे उनकी शादी की कुमकुम पत्रिका कविता में बनाकर दे। उनके इस अनुरोध पर नानाजी ने पांच सवैया बनाकर भेजे जो इस प्रकार से हैं। यह […]

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चारणों की विभिन्न शाखाओं का संक्षिप्त परिचय

आढ़ा चारणों की बीस मूल शाखाओं  (बीसोतर) में “वाचा” शाखा में सांदु, महिया तथा “आढ़ा” सहित सत्रह प्रशाखाएं हैं। इसके अन्तर्गत ही आढ़ा गौत्र मानी जाती है। आढ़ा नामक गांव के नाम पर उक्त शाखा का नाम पड़ा जो कालान्तर में आढ़ा गौत्र में परिवर्तित हो गया। चारण समाज में महान ख्यातनाम कवियों में दुरसाजी आढ़ा का नाम मुख्य रूप से लिया जाता है। इनका जन्म 1535 ईस्वी में आढ़ा (असाड़ा) ग्राम जसोल मलानी (बाड़मेर) में हुआ। इनके पिता मेहाजी आढ़ा तथा दादा अमराजी आढ़ा थे। ये अपनी वीरता, योग्यता एवं कवित्व शक्ति के रूप में राजस्थान में विख्यात हुए। […]

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कानदान कल्पित

स्व. श्री कानदान “कल्पित” आधुनिक राजस्थानी कवियों में मंचीय कविता के एक बेजोड़ कवि हुए हें। राजस्थानी में लिखी अपनी कालजयी रचनाओं के कारण वे कवि सम्मेलनों की पहचान बन गए थे। राजस्थान में नागौर जिले में झोरड़ा नामक गाँव में आपका जन्म हुआ। आपकी कविताओं तथा गीतों में राजस्थानी लोक संस्कृति स्वयं साक्षात हो उठती है। खेत खलिहान, किसान, गांव, बालू मिटटी और रेत के धोरों में बीते बचपन में उन्होंने जीवन के विविध रंग देखे थे और ठेठ ग्रामीण परिवेश में जिए अपने बचपन के अनुभवों को इतनी सहजता से कविता में प्रस्तुत किया कि आम आदमी ने […]

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