अन्नदाता इणनैं ई राजपूत कैवो!

राजस्थानी रो ओ दूहो कितरो भावप्रवण अर वीरोचित्त भाव जगावणियो है-
कंथा कटारी आपरी, ऊभां पगां न देय।
रुदर झिकोल़ी भुय पड़ै, (पछै)भावै सोई लेय।।
इण दूहै नै आप माथै चरितार्थ करणियो मारवाड़ धरा रै गांम कसारी रो चांपावत जोरजी लोक रसना माथै चावो नाम।
बात यूं बणी कै महाराजा जसवंतसिंह (द्वितीय) रै दरबार में किणी विद्रोही राजपूत नैं बेड़़ियां सूं जकड़र सिपाही लाया। दरबार मोद करतां कैयो कै “ओ जसवंतसिंह रो राज है! लांठां -लांठां नैं पाधरा करदे। इणनैं कांई केड़ै तुरमखां नैं म्हारा सिपाही पकड़र ले आवै।”
जोरजी कनै ई ऊभा हा। उणां कैयो “हुकम! म्हनैं ओ राजपूत नीं लागै […]

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काल़जो काढ माधव कह्यो

कूंपां सूं कसियाह, हुरमां सूं हँसिया नहीं।
बिच कबरां बसियाह, मुगल बच्चा महराजवत।।
महावीर कूंपा री अदभुत वीरता विषयक कविवर मेहा वीठू रो ओ दूहो घणो चावो है। इणी कूंपा रै बेटै मांडण री वीरता सूं प्रभावित होय बादशाह अकबर आसोप ठिकाणो दियो। इणी मांडण री वंश परंपरा मे ठाकुर पृथ्वीसिंहजी होया। पृथ्वीसिंहजी महान वीर, स्वामीभक्त, अर विलक्षण व्यक्तित्व रा आदमी हा। एकर महाराजा जसवंतस़िह रै साथै पृथ्वीसिंह ई हा। बादशाह जाँहगीर रै एक पाल़तू सिंह हो।[…]

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गीत सींथल़नाथ गोरेजी रो

चारण देवी उपासक। भैरूं देवी रो आगीवाण सो चारणां रै भैरूं रो जबर इष्ट। चारण भैरूं नैं मामै रै नाम सूं अभिहित करै। मामै रै भाणजा लाडैसर सो घणै चारणां नैं भैरूं रै सजोरै परचां रो वर्णन किंवदंतियां में सुणण नैं मिल़ै। ऐड़ो ई एक किस्सो सींथल़ रा वीठू चारण नारायणसिंह मूल़ा रो है। मध्यकाल़ री बगत सींथल़ रै मूल़ां रै वास में मानदान अर नारायणसिंह दो भाई हा। नारायणसिंह रो ब्याव बूढापै में होयो। घर में कोई खास सरतर नीं हो पण इणां रै गोरै भैरूं रो घणो इष्ट। एकर मेह वरसियो पण हलोतियै रो कोई साधन नारायणजी कनै नीं। उणां गोरै रै थान में जाय धरणो दियो।[…]

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ले, वडभागी हल़ में म्हनै जोड़

सत कर्मां रै सुजस री सोरम इणगत पसरै कै उणरै सुखद लहरकै रो स्वाद हर कोई लेवणो चावै। इण विमल़ बेकल़ू में केई ऐड़ा नर रतन जनमिया जिणां रै नाम साम्य रै पाण लोकां आपरी मनघड़त सूं आपरै भांयखै रै आदम्यां रा नाम उणां री अजंसजोग कथा साथै जोड़ दिया।
ऐड़ो ई एक नर रतन हो भाटी देपाल़दे जैतूंग। जैतूंग राव तणू रो छोटो भाई।[…]

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जैतियै रै च्यार जूत जरकावो नीं !

कॉलेज में आया जद किणी राजस्थानी विद्वान सूं एक व्याख्यान में राजस्थानी रो एक दूहो सुणियो- मरस्यां तो मोटै मतै, सो जग कहै सपूत। जीस्यां तो देस्यां जरू, जुलम्यां रै सिर जूत।। व्याख्यान कर्ता इण दूहै रै रचणहार रो नाम जनकवि शंकरदान सामोर बतायो। दूहै रो मर्म अंतस नैं प्रभावित अर मानस में घर करगयो। बिनां सच्चाई जाणियां म्है ई इण दूहै नै शंकरदानजी रो ई मानण लागग्यो। आ ई नीं म्है इणनैं म्हारै एक आलेख”डिंगल़ गीतां में चारण कवियां रो सूरापण “में इणी कवि रै नाम सूं उद्धृत ई कर दियो, पण हकीकत में म्हारी आ भूल ही। इण […]

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सोम भाई सोम ! (भाटी सोमसी रतनावत एक ओल़खाण)

प्रकृति रो नियम है कै मोत किणी नैं ई नीं छोडै। भलांई वो कायर होवो भलांई वीर ! मरणो सबनै है पण किणी कवि केयो है कै कायर होवो भलांई वीर पण दोनां रो मरण तय। तोई फरक है, कायर मर धूड़ भैल़ो होवै पण सूर जस री देह में नवो जमारो धारण करै- सूर मरै कायर मरै, अंतर दोनूं ऐह। कायर मर माटी मिल़ै, धसै सूर जस देह।। ऐड़ै ई एक जसधारी री ओल़खाण देय रैयो हूं, जिणरी ओल़खाण आज इतिहास री गरद में दबगी। पण जैड़ो कै कैयो गयो है कै “कवि की जबान पे चढै सो नर […]

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कवि सम्मान में आपरो कंवर अर्पित करणियो कर्मसी राठौड़

राजस्थान रै साहित्यिक इतिहास में कविवर आसाजी / आसाणंदजी बारठ रो नाम जितरो चावो उतरो ई आदरणीय। सत्य वक्ता, निर्लोभी, मित्र धर्म पाल़णिया, घण जोड़ा अर चारणाचार सूं मंडित आसोजी समूल़ी राजपूत रियासतां में मोटो नाम। भाद्रेस रा बारठ दीताजी रै घरै कवि रो जनम होयो अर नाथूसर कवि री कर्मस्थल़ी – दीतावत मालुम दुनी सो जाणै संसार। नाथूसर मथुरा नगर आसो हरि अवतार।। कोटड़ै रा राठौड़ वाघोजी कोटड़ियो उणां रा मन रा मीत ।एकै दांत रोटी तूटै।वाघैजी नैं राव मालदेव डावड़ी भारमली दीनी।रूप री रंभा अर लावण्य री मूर्ति। रावजी रो मन भारमली रै बिनां लागै नीं।उणां आसैजी नैं […]

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खातो महाराज पदमसिंह रो साख सूरज री

सेल त्रिभागो झालियां मूंछां वांकड़ियांह। आंखड़ियां देखां पदम सुख्यारथ घड़ियांह।। इण दूहै रै रचणहार कवि एकदम सही कही है कै जिण बगत पदमसिंह नैं देखूं बा घड़ी सुख री होवै। बीकानेर महाराजा कर्णसिंह रा सपूत पदमसिंह महान वीर, उदार पुरुष अर क्षत्रिय गुणां सूं मंडित राजपूत हा। उदारता अर वीरता इणां नैं वंश परंपरा में मिली – दादो रायांसिंघ है नांनो राव रतन्न। प्रिथी वडाल़ा पदमसी दियण वडाल़ा दन्न। उणां री वीरता विषयक घणी ई बातां इतिहास में संकलित है पण म्है उणां री अदभुत उदारता री बात बताय रैयो हूं। मगरै रै गांव मोखां रा बीठू गोगदान रै घरै नादारगी […]

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म्है भाई नीं, बड जानी हूं

किणी कवि सही कैयो है कै देणो मरणै सूं ई दोरो। इणी कारण ओ दूहो चावो है कै जिकै समझदार होवे उणां सूं तीन काम संज नीं आवै दैणो, मरणो अर मारणो। ऐ काम तो काला होवै बै ई कर सकै –

नर सैणां सूं व्है नहीं, निपट अनैखा नाम।
दैणा मरणा मारणा, कालां हंदा काम।।

ऐड़ो ई एक प्रसंग है बीकानेर महाराजा गजसिंहजी रै खास मर्जीदान कवि गोपीनाथजी गाडण रो। गोपीनाथजी गाडण आपरी बगत रा मोटा कवि जिणां महाराजा गजसिंहजी री वीरता अर उदारता नै वर्णनीय विषय बणाय “ग्रंथराज ” नामक ग्रंथ बणायो। […]

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कवि री बात राखण नै, कियो जैसलमेर माथै हमलो

 बीकानेर रा राव लूणकरणजी वीर, स्वाभिमानी अर उदार नरेश हा। केई जंगां में आपरी तरवार रो तेज अरियां नैं बतायो तो दातारगी री छौल़ा ई करी। राव लूणकरणजी रै ई समकालीन कवि हा लालोजी मेहडू। बीकानेर रा संस्थापक राव बीकैजी रै साथै आवणियां में एक मेहडू सतोजी ई हा। इणी सतोजी रा बेटा हा लालोजी मेहडू। सतोजी नै राव बीकाजी खारी गांव दियो। लालोजी मेहडू आपरी बगत रो मोटा कवि अर बलाय रो बटको हा। एकर लालोजी जैसलमेर गया। जैसलमेर रावल देवीदासजी, बीकानेर राव लूणकरणजी रा हंसा उडाया अर आवल़िया बकिया। लूणकरणजी रा हंसा सुण र लालैजी नैं रीस आयगी बां […]

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