करनी बिन कुण मदत करे!

करनी बिन कुण मदत करै।।टेर।।

कल़जुग राह कठण हुई कटणी
डग मन धरत डरै
थल़वट राय भरोसै थारै
तरणी दास तरै।।१
करनी बिन कुण मदत करै।।[…]

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चिरजा – डूंगरराय री

मगरिया मन मोहणा रे! रमै जिथ डूंगरराय।।टेर।।

अड़डड़ घाल चल़ु में उदधि, सुरड़ लियो सोखाय।
सड़डड़ चीर फैंक दिस सूरज, लंबहथ दियो लुकाय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

हणिया दैत बीसहथ हाथां, ढिगल किया रण ढाय।
भाखरियां बैठी मनभावण, गाथा जग गवराय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।[…]

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जयो रंग करन्नल मात रमै – महाकवि मेहाजी वीठू झिणकली/खेड़ी

।।छंद -रोमकंद।।
वज भूंगल़ चंग मृदंग वल़ोबल डाक त्रंबाक वजै डमरू।
सहनाइय मादल़ भेर वखाणस संख सो झाल़र वीण सरू।
उपवै तन वाजत भाँत अनोअन पार अपार न कोय प्रमै
दुति गात प्रकासत रात चवद्दस रंग करन्नल मात रमै। […]

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श्री सुरेन्द्र सिंह रत्नू

सुरेन्द्र सिंह रत्नू पुत्र श्री हिंगलाज सिंह जी रत्नू प्रपोत्र श्री गंगा सिंह जी रत्नू गाँव जिलिया चारणवास (ज़िला नागोर) का जन्म २२ अक्टूबर १९५१ को गाँव सेवापुरा में हुआ। स्टैट बैंक ओफ़ बीकानेर एण्ड जयपुर में मैनेजर के पद से रिटायर सुरेन्द्र सिंह जी ने श्री बांगड कॉलेज डीडवाना से साइंस मेथ्स में स्नातक किया तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ओफ़ बेंकर्स, मुंबई से C.A.I.I.B. करने के अतिरिक्त कम्प्यूटर की शिक्षा भी प्राप्त की। संगीत का शोक आपको शुरू से ही था। आपने गायकी में भातखंडे संगीत विद्यापीठ, लखनऊ से तीन वर्ष का डिप्लोमा भी किया। चिरजा गायन में आप एक […]

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