चामुंडा माताजी रो डिंगळ गीत – कवि राघवदान जबरदान देवका
प्रणमो प्रेमे महाप्रचंडी।
चरिताळी चामुंडा चंडी।
छप्पन कोटि रुप कराळी।
चरण नमूं चोटीला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥1॥
महा समरथ तुंही मंहमाया।
चवदह ब्रहमंड तुं सुरराया।
महिखमारणी तुं महाकाळी ।
चरण नमूं चोटिला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥2॥[…]