चामुंडा माताजी रो डिंगळ गीत – कवि राघवदान जबरदान देवका

प्रणमो प्रेमे महाप्रचंडी।
चरिताळी चामुंडा चंडी।
छप्पन कोटि रुप कराळी।
चरण नमूं चोटीला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥1॥

महा समरथ तुंही मंहमाया।
चवदह ब्रहमंड तुं सुरराया।
महिखमारणी तुं महाकाळी ।
चरण नमूं चोटिला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥2॥[…]

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विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरू जांभोजी एवं उनके शिष्य अलूनाथ जी कविया

🌺🌺कविराज अलूजी चारण🌺🌺

गुरु जांभोजी के शिष्य तथा हजुरी चारण कवि अलूजी चारण जिनको चारणी साहित्य में सिद्ध अलूनाथ कविया कहा गया है।
अलूजी चारण के गुरु जांभोजी की स्तुति में कहे गये कवित, जिसमें जाम्भोजी को भगवान विष्णु व कृष्ण के साक्षात अवतार मानकर अभ्यर्थना की है।

।।छप्पय।।
जिण वासिग नाथियो, जिण कंसासुर मारै।
जिण गोकळ राखियो, अनड़ आंगळी उधारै।।
जिणि पूतना प्रहारि, लीया थण खीर उपाड़ै।
कागासर छेदियो, चंदगिरि नांवै चाड़ै।।[…]

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शिकवा! – राजेश विद्रोही (राजूदान जी खिडिया)

यतीमी थी मुक़द्दर में निगहबानों से क्या शिकवा?
ग़िला गुलज़ार से कैसा बियाबानों से क्या शिकवा??

मिले हैं ग़म के नज़राने हमें अपनों से दुनियां में ।
शिकायत ग़ैर से क्या और बेगानों से क्या शिकवा??

परिन्दों के मुक़द्दर में क़फ़स की क़ैद लिक्खी थी ।
ग़िला सय्याद से क्या और गुलिस्तानों से क्या शिकवा ??[…]

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यक़ीनन ये गिले शिकवे – राजेश विद्रोही (राजूदान जी खिडिया)

यक़ीनन ये गिले शिकवे अग़र बाहम हुये होते।
दिलों के फासले यारों कभी के कम हुये होते।।

कभी इक दूसरे को हमने पहचाना नहीं वरना।
न तुम शिकवा व लब होते ना हम बरहम हुये होते।।

कभी मिलकर के हमने काश खुशियाँ बांट ली होतीं।
कभी इक दूसरे के हम शरीक़ेग़म हुये होते।।[…]

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शहीद प्रभू सिंह राठौड़ नें श्रध्धांजली

अड़यो ओनाड़ वो आतंक सूं सिंवाड़ै
मौद सूं फूल नह कवच मायो।
अमर कर नाम अखियात इण इळा पर
अमरपुर सिधायो चंदजायो।।

प्रभू नै पियारो होयग्यो प्रभुसिंह
सोयग्यो चुका कर कर्ज सारो।
मौयग्यो मरद वो हिन्द री भोम नै
तनक में खोयग्यो चंद-तारो।।[…]

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गज़लें – राजेश विद्रोही(राजूदान जी खिडिया)

ये जानी पहचानी ग़ज़लें।
ख़ालिस हिन्दुस्तानी ग़ज़लें।।
कान्हा की मुरली में खोयी।
मीरा सी दीवानी ग़ज़लें।।
नानक सूर कबीरा गाये।
भाव भरी रूहानी ग़ज़लें।।[…]

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बेटियाँ – राजेश विद्रोही(राजूदान जी खिडिया)

बाबुल की बेशक़ीमती थाती है बेटियाँ।
बेटे अग़र चिराग हैं बाती हैं बेटियाँ।।

अंजाम हर फ़रज को हमेशा दिया मग़र।
हरग़िज नहीं हकूक जताती हैं बेटियाँ।।

बेटों से एक घर भी संभलता नहीं मग़र।
दो मुख़्तलिफ़ घरों को मिलाती हैं बेटियाँ।।

बाबुल की देहरी से विदाई के बाद भी।
नैहर के नेगचार निभाती हैं बेटियाँ।।[…]

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बड़े मियाँ – राजेश विद्रोही(राजूदान जी खिडिया)

सबकी सुनकर भी अपनी पर अड़े हुये हैं बड़े मियाँ।
लोग शहर के कैसे चिकने घड़े हुये हैं बड़े मियाँ।
पहले यूं ख़ुदगर्ज़ नहीं था कुछ अपनापा बाक़ी था।
आख़िर हम भी इसी शहर में बड़े हुये हैं बड़े मियाँ।
ये मत सोचो इस मरभुख्खे गाँव में क्या तो रक्खा है।
जाने कितने बड़े ख़जाने गड़े हुये हैं बड़े मियाँ।[…]

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बदलते हैं – ग़ज़ल – राजेश विद्रोही (राजूदान जी खिडिया)

बदलने को बहुत कुछ आज भी अक्सर बदलते हैं।
न शीशे हम बदलते हैं न वो पत्थर बदलते हैं।।

ज़मीं फिरती है बरसों और फ़लक बरसों बरसता है।
कसम से तब कहीं जाकर ये पसमंजर बदलते हैं।।

हमें ख़ौफ़े ख़ुदा है और तुम्हें ज़ालिम जहाँ का डर।
चलो कुछ देर की ख़ातिर हम अपने डर बदलते हैं।।

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बच्चे – ग़ज़ल – राजेश विद्रोही

हमारे मुल्क में मासूमियत खोते हुये बच्चे .
लङकपन में बुजुर्गों की तरह होते हुये बच्चे ..

कहीं से भी किसी उम्मीद के वारिस नहीं लगते .
घरौंदो की बगल में बेबसी बोते हुये बच्चे ..

उदय होते हुये भारत की शाईनिंग पे धब्बा हैं.
अभावों की सङक पर गिट्टियाँ ढोते हुये बच्चे .[…]

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