गढ में तो ऊभो बड़ियो हूं, सो आडो ई निकल़सूं

इण दिनां फेसबुक अर वाटस्एप माथै जोगीदास चारण अर महाराजा मानसिंह सूं संबंधित एक जोरदार कहाणी पढण नै मिल़ रैयी है। कुण लिखी आ तो ठाह नीं पण आगै सूं आगै धकावण में खासै ढंगरै मिनखां रा नाम पढिया। म्है उण सगल़ै लेखक मित्रां नैं बतावणी चावूं कै आप जिण जोगीदास नै चारण बता रैया हो बै पातावत राठौड़ हा। बात यूं है – जोधपुर माथै उण दिना अभयसिंहजी रो राज हो महाराजा रा हल थकिया अर लागण लागो कै अबै ओ शरीर कणै ई बरतीज सकै। जद उणां आपरै स्वामीभक्त अर विसवासी सिरदारां नैं बुलाय वचन लियो कै जे […]

» Read more

🌹सरस्वती वंदना🌹- कवि स्व अजयदान जी लखदान जी रोहडिया

🌹छंद नाराच🌹
घनान्धकार नाशिनी विनाशिनी विमूढता।
प्रज्ञा प्रदायिनी प्रकाश वर्धनी प्रगूढता।
हरि हरादि पूजिता, विरंचि वंदिता अति।
प्रसन्न हो प्रयच्छ बुद्धि स्वच्छ मां सरस्वती।। १

» Read more

आऊवै धरणै रा महानायक अखोजी बारठ

मारवाड़ रै मध्यकालीन इतिहास में आऊवा रो चारण धरणो चावो है। मारवाड़ रै शासकां अर चारणां रा संबंध प्रगाढ रैया है पण जोगानजोग राजा उदयसिंह री बगत ऐ संबंध किणी गल़तफहमी रा शिकार होय बिगड़ग्या। उदयसिंह चारणां रा गांम जबत कर लिया। विरोध होयो। समझाइस होई पण राजा नीं मानियो। छेवट1643 वि. में चारणां आऊवै री आंटीली धरती माथै धरणो दियो।
आऊवो उण दिन ठाकुर गोपाल़दासजी चांपावत री जागीर रो एक गांम हो। राजा गोपाल़दासजी नैं कैवायो कै धरणो म्हारै खिलाफ है सो आप धरणो उठावो। नीतर हूं गांम खालसै कर दूंला।

» Read more

आऊवा रो मरण-महोछब!

साचाणी आ बात मनणजोग नीं है कै मरण रो ई कोई महोछब मनावै !! पण जद आपां राजस्थान रै मध्यकालीन इतिहास नै पढां तो आपां रै साम्हीं ऐड़ा अलेखूं दाखला सावचड़ूड़ आवै कै अठै पग-पग माथै मरण महोछब मनाईज्या हा। जिण गढां में शाका हुया, उठै रै उछब रो आजरा आपां काल़जै-पीतै बायरा या संवेदनाशून्य मिनख किणी पण रूप में कूंतो नीं कर सकां। धधकती झाल़ां में सोल़ै सिंणगार सज आपरो अंग अगन नै सूंपणो आपां री समझ में नासमझी हुय सकै पण जिणां री मा सेर सूंठ खाय थण चूंगाया या जिकै डोढ हाथ रो काल़जो राखता वै ई आ बात जाणता कै वै कितरै गीरबै रो काम कर’र आवणवाल़ी पीढ्यां रै सारू स्वाभिमान, कुलीनता अर गरिमा रो वट ऊगाय’र जा रह्या है।[…]

» Read more

रंग गंगा रै पाणी नैं! रंग ईसर री ढांणी नैं

इण धरा रै कण – कण में वीरता रा कणूका हा, आ बात चालै तो इण रै लारै केई बातां गिणाई जा सकै। अठै खींपां रै खोलड़ां में रैवण वाल़ा गढां सूं टकरां लेवण में आगै रैवता। आखड़ी झाली तो उणनैं फुरणां में वायरो फरुकियो जितै पाल़ण रो जतन करता।
ऐड़ो ई एक आखड़ीधारी वीर हो ईसर मोयल (मोहिल) सफा घर धणी। मारवाड़ रै बिदियाद गांम रो वासी। कनै फगत एक खेत री जागीर। उठै ई आपरी ढांणी जचाय रैवै। आखड़ी आ कै उणनैं गायां रै हरण रो ठाह लागज्या तो वो गायां पाछी लायां बिनां पाणी नीं पीवै। गायां भलांई कठै री होवो, किणरी होवो जे उण गायां नैं हरण कर्योड़ी देखली तो वाहर चढैलो ई।[…]

» Read more

अन्नदाता इणनैं ई राजपूत कैवो!

राजस्थानी रो ओ दूहो कितरो भावप्रवण अर वीरोचित्त भाव जगावणियो है-
कंथा कटारी आपरी, ऊभां पगां न देय।
रुदर झिकोल़ी भुय पड़ै, (पछै)भावै सोई लेय।।
इण दूहै नै आप माथै चरितार्थ करणियो मारवाड़ धरा रै गांम कसारी रो चांपावत जोरजी लोक रसना माथै चावो नाम।
बात यूं बणी कै महाराजा जसवंतसिंह (द्वितीय) रै दरबार में किणी विद्रोही राजपूत नैं बेड़़ियां सूं जकड़र सिपाही लाया। दरबार मोद करतां कैयो कै “ओ जसवंतसिंह रो राज है! लांठां -लांठां नैं पाधरा करदे। इणनैं कांई केड़ै तुरमखां नैं म्हारा सिपाही पकड़र ले आवै।”
जोरजी कनै ई ऊभा हा। उणां कैयो “हुकम! म्हनैं ओ राजपूत नीं लागै […]

» Read more

इन्द्रवा रा सोरठा – डॉ. शक्तिदान जी कविया कृत

नर नारी मे नेह. घर मे व्हे संपत घणो।
गिणो सुरग ज्यू गेह. अंतस भरियो इन्द्रवा।।१
धौलो दूध न धार, सब पीलो सोनो नही।
सांग घणा संसार, ओलखणा झट इन्द्रवा।।२
घण सुख री घडियोह, सगली दुनिया साथ दे।
पण अबखी पडियोह, आवै विरला इन्द्रवा।।३
माथे रो अभिमान. पगां पडतो पेखियो।
सब दिन व्हे न समान.आ मत भूले इन्द्रवा।।४

» Read more

काल़जो काढ माधव कह्यो

कूंपां सूं कसियाह, हुरमां सूं हँसिया नहीं।
बिच कबरां बसियाह, मुगल बच्चा महराजवत।।
महावीर कूंपा री अदभुत वीरता विषयक कविवर मेहा वीठू रो ओ दूहो घणो चावो है। इणी कूंपा रै बेटै मांडण री वीरता सूं प्रभावित होय बादशाह अकबर आसोप ठिकाणो दियो। इणी मांडण री वंश परंपरा मे ठाकुर पृथ्वीसिंहजी होया। पृथ्वीसिंहजी महान वीर, स्वामीभक्त, अर विलक्षण व्यक्तित्व रा आदमी हा। एकर महाराजा जसवंतस़िह रै साथै पृथ्वीसिंह ई हा। बादशाह जाँहगीर रै एक पाल़तू सिंह हो।[…]

» Read more

बीरवड़ी वंदना

छंद सारसी
अन्नपूर आई चक्खड़ाई, तूं सदाई सेवियां।
बातां बधाई बह बडाई, दख सवाई देवियां।
नरपत नमाई इम अथाई, पहुम बाई परवड़ी।
निज सुजस जाहर चढै नाहर, बणै वाहर बिरवड़ी।। 1 […]

» Read more
1 91 92 93 94 95 114