काळिया रा सोरठा

गळ विच गूंजामाळ,मोर पंख रो मौड सिर।
रहजै थूं रखवाळ,करूणा सागर काळिया॥1
कविता बाग-कळीह,सौरम देवै सांतरी।
भावां शबद भरीह,केवूं साची काळिया॥2
अनहद नद बध बध बहै,अंतस होय अणंद।
दूहा सोरठा छंद,कल कल धारा काळिया॥3 […]

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रे फूलों रा राजवी

रे फूलों रा राजवी, गाढा रंग गुलाब।
दरस परस दोनूं कियां, दुख दे मन रा दाब॥1

गहरा फूल गुलाब जी, आयौ थारे पास।
आणँद मन नें आपजै, मन मत करे निराश॥2

गहरा फूल गुलाब रा, कंटक मँह आवास?
सबरो घर सुरभित करे, पण खुद ने दे त्रास।3 […]

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गुलाब लाजवाब है

छंद नाराच

हरी हरी ज पांनडी लगे घणी सुहावणी।
कळी फबै है फूटरी मनां तनां लुभावणी।
पणां सँभाळ कंटकां इ’रा घणा खराब है।
लख्यौ ललाम लाल वो गुलाब लाजवाब है॥1

कळी कळी महेकती गळी गळी सुबास है।
सुगंध चारू कूंट में हरेक रो औ खास है।
जणां जणां मनां तणो रिझावणौ जनाब है।
लख्यौ ललाम लाल वो गुलाब लाजवाब है॥2 […]

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आ रे मेरे जोगिया

इश्क चदरिया मैं सखी!,करूं गेरुआ रंग।
फिर बन बन डौलत फिरूं,निरमोही के संग॥1

जोगी के दरबार से,आया यह संदेश।
बांध गठरिया देह की, चलो बिराने देश॥2

जोगी तेरे नैन में, देख सजूं शृंगार।
इश्क चुनरिया ओढ फिर, करूं प्रणय मनुहार॥3 […]

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यादों की सोनापरी

पलकों में उमडा सखी, यादों का सैलाब।
लगी बरसनें आंख फिर, भीगे सारे ख्वाब॥1

(पलकां सजनी आवियौ, यादों रो सैलाब।
आंख हुई सावण झडी, भिंज्यां सारा ख्वाब॥1)

यादों की सोनापरी, आ बैठौ मन मांय।
सखी तुम्हारे वासते, जाजम रखी बिछाय॥2

(यादों री सोनापरी, आव बैठ मन मांय।
सजनी थारै वासतै, जाजम दई बिछाय॥2) […]

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यादों की देवी तुझै

गडियोडो धन थूं सखी, पडियौ मन संदूक।

खडो रहै प्हौरो भरूं, हाथ-कलम-बंदूक॥1

(गडा खजाना तू सखी, पडा मनोसंदूक।

खडा खडा पहरा भरुं, तान कलम -बंदूक॥1) […]

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केसरिया बालम कहूं

केसरिया बालम कहूं, गाढा माढां राग।
आवो घर अलबेलडा, उपजावण अनुराग॥1

केसरिया बालम कहूं, जळूं बिरह री झाळ।
आव अषाढी मेह जिम, (तो) भींजूं इण बरसाळ॥2

केसरिया बालम कहूं,नेह निभाज्यो नाह।
आय मिळो म्हाने अठे,गाढ भरण गळबांह॥3

केसरिया बालम कहूं,गाढ गुलाबी रंग।
इण तन चंदण रूंखडै,लिपट्या विरह भुजंग॥4[…]

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बिरहण धण रो ओळभौ

कंथा कंथा पेर ने, बण जातौ थूं संत।
तौ नी पंथ उडीकती, साची बात कहंत॥1
पण थूं चाल्यौ चाकरी, पकडी वाट विदेश।
इणसूं थने उडीकती, रहती राज हमेश॥2
दिन उगियां पूछुं पथिक, रोज उडाडूं काग।
तौ पण थूं आवै नहीं, फूटा मारा भाग॥3 […]

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रंग रे दुहा रंग

भाव कथे हर भाख में,उर रा घणे उमंग।
कवि सुरसत कंठाभरण,रंग रे दुहा रंग॥1

ब्रज भासा डिंगळ तथा,गुर्जर भासा गंग।
उत्तर भारत रा अजब,दुहा छंद ने रंग॥2

नवरस री नव कल्पना,सरस उकति रे संग।
कल्पक रा कविता कथन,रंग रे दुहा रंग॥3 […]

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कुरजां बिरहण यूं कहै

कुंझडियां परदेसियां,आवै अर उड जाय।
साच नेह सफरी तणो,जळ भेळी सूखाय॥1

पावस मास विदेस पिव,जळूं विरह री झाळ।
थूं कुरजां बरसात में,भींजै सरवर पाळ॥2

कुरजां थारी पांख पर,आखर लिखूं अथाह।
बालम नें बंचाय दे,बिरहण मन री आह॥3 […]

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