मढ में आवड मात रे

मढ में आवड मात रे, बजै ढोल तोतींग।
धींगड धींगड धींग ध्रं, धींगड धींगड धींग।।177

मढ में आवड मात रे, मोटो बजै मृदंग।
तिरकिट तिरकिट तुम ततक, तिरकिट तिरकिट तंग।।178

मढ में आवड मात रे, झालर बजै विराट।
झणणण झणणण झणण झण, झणण झणण झणणाट।।179

मढ में आवड मात रे, थाळी वजै अनंत।
थणणण थणणण थणण थण, थणण थणण थण थंत।।180[…]

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हिये दरस री हाम

पंथ विकट पाळो चलण, माथे अनड मुकाम।
हुकम करो हिंगळाज मां, हिये दरस री हाम॥1
मन मंदिर मँह मावडी, करता रोज मुकाम।
महर करो माजी हमें, हिये दरस री हाम॥2
अलख निरंजन री सखी, अनपूरण अभिराम।
धरा कोहला री धणी, हिये दरस री हाम॥3 […]

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सदा ऋचावां साम री

रस मय कविता गागरी, छलके दोहा छंद।
डिंगळ री डणकार में, आठ पोर आणंद॥1

मन रो नाचै मोरियौ, आठ पोर अणमाप।
डिंगळ री डणकार में, डफ मृदंग री थाप॥2

वीण पाणि वर दायिनी, बसती अठे विशेस।
आठूं पोर उछाळती,कविता रतन हमेश॥3 […]

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शबद आराधना

शबद अमीणौ साइनो, मै शबदां रो पीर।
करुं शबद आराधना, सुरसत रे मंदीर॥1

शबद दरद, अहसास मन, वाणी, ध्वनि, लय, छंद।
यति, गति मय विध रुप धर, उर बगसे आणंद॥2

म्हूं शबदां रो जोहरी, कविता नवलख हार।
पोयी लडियां शबद री, “शारद कर स्वीकार”॥3 […]

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शिव वंदना का भाव-काळिया रा सोरठा

शंकर री कर सेव,जटी, धुरजटी, गंग- धर।
वडो विभु महादेव,कर हर समरण काळिया॥131

परसु-धरण पिनाक,भाल-ससी , भव, भूतपत ।
कापालिक, कर- डाक,कर हर समरण काळिया॥132

नमन करो नटराज,पति नगराज- सुता, परम।
सकल दियण सुख साज,कुण है शिव बिन काळिया॥133 […]

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सूर्य वंदना के भाव के – काळिया रा सोरठा

🌹सूर्य वंदना के भाव के🌹

वंदन कर विख्यात,जगत तात जगदीस ने।
प्हेली ऊठर प्रात,काछप सुत भज काळिया।111

अवनी भरण उजास,नह चूके नित ऊगणौ।
सदा- रथिन् सपतास,काछप सुत भज काळिया॥112

भास्कर आदित भांण, मित्र मिहिर मार्तंड वळ।
करवा जग कल्यांण,कायम ऊगै काळिया॥113 […]

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बीसा छंद खोडियार जी रो

अवनी नभ पातळ और नही कछु, पाणि पवन्न हुता न पृथी।
सब शुन्न चराचर सृष्टि सृजि, सुभ, कारण-पाळण हार कथी।
लख शुन्न सु शुन्न दियां रु लियां लवलेश नही घटियो लखियो ।
खमकार करो खपराळिय खोडल, याद करे तव बाळकियो॥1 […]

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काळिया रा सोरठा-भैरू जी रे भाव रा

हेलो सुणै हमेश,मामा थूं रहजे मदत।
वळे न चहूं विशेष,करजै इतरो काळिया॥71

तन सिंदूरी तेल,बळे चढावूं बाकरा।
छाक धरूंला छेल,कर किरपा अब काळिया॥72

लाखां दाखां लार, राखां नाखां तज लवँग।
तिण रो मद है त्यार,कहूं छाक ले काल़िया॥73 […]

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मांझल रात अमोल-वैतालिक

सौ कोसां साजन बसे, पूगावै उण पोळ।

सुपना वाळ सुहामणी, मांझल रात अमोल॥1

बालम तौ जालम घणौ, करतौ टाळम टौळ।

(पण) सुपने सजण मिलावती, मांझल रात अमोल॥2

इक चंदौ आकाश में, दूजौ रंग रे म्हौल।

झिल मिल झिल मिल जोसना, मांझल रात अमोल॥3 […]

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