बारहमासा गीत – विरह शृंगार

॥सावन॥
सावन बरसे! सब जन हरसे, झिरमिर बरसे मेह!
बैठे तुम परदेस में प्रियतम, निठुर छोड़ के नेह!!
बूँदों की पाजेब पहनकर, ओढ़ चुनरिया धानी!
करे नवोढ़ा धरती इस रुत, बादल से मनमानी!!
राह तकूँ मैं बैठ अकेली, सूनी सरोवर पाल!
घर आजा परदेसी! तुम बिन, जीना हुआ मुहाल!![…]

» Read more

देवी विनय स्तुति

हिमगिरि-विन्ध्य-निवासिनी! नग-कोहला तव वास!
त्रिपुरसुंदरी! त्र्यंबके! त्वरित हरो यम-त्रास!!1
ब्रह्मचारिणी! भैरवी! करो दनुज का नाश!
सुर-नर-किन्नर-नाग-मुनि, खड़े लिए यह आश!!2…

» Read more

बूडत है भवसिंधु में बेरो

…।।मत्तगयंद सवैया।।
कोंधत बीजु अकास भयंकर, आज अमावस रैन अँधेरो!
घोर घटा नभ में गरजै, जनु बाजत जुद्ध नगारन ढेरो!
डोलत है जलपोत, उठै जल-वीचि, ज्यूँ शृंग उतुंग घनेरो!
अंब! करूं अरदास उबारहु, बूडत है भवसिंधु में बेरो!!
श्री करनी! हर संकट मेरो।।1।।…

» Read more

एक झूठ को सभी ने बिना पड़ताल सच्च मान लिया

….विरोध के और भी कारण हो सकते हैं। उन पर अनुसंधान की आवश्यकता है। लेकिन सरूपदेजी झाली का एक चारण की हठधर्मिता से हाथ टूटने की कथा नितांत झूठी है। यह एक कपोल कल्पित व भ्रामक कथा गढ़ी गई ताकि निरपराध सैंकड़ों चारणों के मरने के आरोप में राज व राजा के प्रति झूठी हमदर्दी बटोरी जा सके।…

» Read more

फूंफी रासो – ठाकुर मुरारदान जी मण्डपी

दोहा पति जयपुर जोधाण पत, भेळा होय दो भूप। सांभर की किन्हीं सला, रच्यो राड़ को रूप।।1।। कूरम भाखी कमधजां, असी करां उपाय। उभयराज राखां अठै, आख्या चौड़े आय।।2।। आप पति आमेर है, कही कमध कर जोड़। मो आफत बीती हमे, रूस रह्या राठौड़।।3।। तिण जागां इक तुरकड़ी, आई करण उपाय। बहकाई दळ देखकर, जकी सुणाई जाय।।4।। जयपुर दळ आयो जबर, हारो मत अब धीर। ताण दिया तम्बु बड़ा, नळियासर की तीर।।5।। शेख समद काजी मुगल, सुण सारा समचार। मदद बुलायो मीर खां, धीरज मन में धार।।6।। आठ दिवस आयो नहीं, मुगलन को बो मोड़। सा सांभर खाली करो, कच्छावन […]

» Read more

माँ गंगा की स्तुति – महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण

॥भुजङ्गप्रयातम् गीर्वाणभाषा॥

नमस्ते नमस्ते नमो देवि गङ्गे,
नमो जह्नुजे पूतपाथस्तरङ्गे।
नमस्ते कपर्दासने भर्गजाये,
नमस्ते ज्वलत्सम्बरे मूलमाये॥१॥

[…]

» Read more

नर्मदा स्तुति / रेवा गीतम – वसंततिलका

विन्ध्याचले अमरकंटक रुप बाला!
पहेरी वहे तरु-लता-द्रुम नो दुशाला!
प्रादुर्भवी जगतने सुख मोक्ष देवा!
नौमि! त्वदीय पद पंकज मात रेवा!!१

[…]

» Read more

रामदेव पीर वंदना

!!छंद नाराच!!
गळे विशाळ मुक्त माळ शीश पाघ सोहती!
मुखाकृति मनोहरं वळी रहै विमोहती!
सवार लीले घोड़लै धजा सुश्वेत ना धणी!
घणी खमा श्री रामदेव बार बीज ना धणी!!१
खमा घणी! खमा घणी! खमा घणी! खमा घणी!

[…]

» Read more
1 2 3 115