कीनी क्यूं जेज इति किनियांणी!! – जंवारजी किनिया
आजकल किसी चमत्कार की बात लिखते हुए ऊहापोह की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, क्योंकि लोग अंधविश्वासी घोषित करते हुए जेज नहीं करते !! कुछ हद तक यह बात सही भी है कि आजकल स्वार्थी लोग मनगढ़ंत बातों को प्रचार का सहारा लेकर प्रसारित कर दुकानदारी चलातें हैं।
मैं आपसे उन लोगों के संस्मरण साझा कर रहा हूं जिनके हृदय में अगाध आस्था और भक्ति की भागीरथी प्रवाहित होती थी।
मेरे दादोसा (गणेशदानजी रतनू) का ननिहाल सुवाप था। वे अपने ननिहाल का एक संस्मरण सुनाते थे कि सुवाप में जंवारजी किनिया थे। उनके एक ही पुत्र था। पुत्र जवान हुआ और एक दिन दोपहर को अकस्मात काल कवलित हो गया। लोगबाग अर्थी बनाने लगे तो जंवारजी ने दृढ़ता से मना कर दिया और कहा कि “भूवा अवस हेलो सुणसी।”[…]