माटी थनै बोलणौ पड़सी – कवि रेवतदान चारण

मूंन राखियां मिनख मरैला।
धरती नेम तोड़णौ पड़सी।।
करणौ पड़सी न्याय छेड़लौ, माटी थनै बोलणौ पड़सी।

कुण धरती रौ अंदाता है, कुण धरती रौ धारणहार ?
कुण धरती रौ करता-धरता, कुध धरती रै ऊपर भार ?
किण रै हाथां खेत-खेत में, लीली खेती पाकै है ?
किण रै पांण देष री गाड़ी, अधबिच आती थाकै है ?
कहणौ पड़सी खरौ न खोटौ, सांचौ भेद खोलणी पड़सी।।
माटी थनै बोलणौ पड़सी।
मूंन राखियां मिनख मरैला।
धरती नेम तोड़णौ पड़सी।।[…]

» Read more

इण आजादी री इज्जत नैं, म्हे राजस्थान्यां राखी है

प्रमाण अलेखूं पुख्ता है,
इतिहास जिकण रो साखी है।
इण आजादी री इज्जत नैं,
म्हे राजस्थान्यां राखी है।।

म्हैं इतिहासां में बांच्योड़ी,
साचकली बात बताऊं हूं।
घटना दर घटना भारत रै,
गौरव री गाथ सुणाऊं हूं।
इण गौरवगाथा रै पानां में,
सोनलिया आखर म्हारा है।
कटतोड़ा माथा, धड़ लड़ता,
बख्तर अर पाखर म्हारा है।[…]

» Read more

कवि की पहचान!!

कवियन के सिरताज, भूप के सदा प्रिय,
उकती उटीपी अहो धरा यश जानिये।
किसी की न परवाह बे चाह रहै सदाई,
वरदाई शारद के गावै गुनगानिये।
महाजन से मान देसोतन के सम कहो,
चहुंदिस वंदनीय मनो गुणखानिये।
दंभ नहीं द्वेष नहीं राग -अनुराग नहीं,
गिरधर सौभाग ऐसे महाकवि मानिये।।[…]

» Read more

थूं म्हारो अरमान लाडेसर

थूं म्हारो अरमान लाडेसर,
मान सकै तो मान लाडेसर।
म्हारो तन, मन, जीवण थूं ही,
थूं है म्हारी ज्यान लाडेसर।।

मायड़ समझ आँख रो तारो,
तुझ पर व्है कुरबान लाडेसर।
बूढापै बाबल री लाठी,
बतळावै विद्वान लाडेसर।।

» Read more

लाडली

आस तणो आधार लाडली
सैणां रो संसार लाडली
मरजादा री असली मूरत
पत-समदर पतवार लाडली।
तूं गणगौर दिवाळी दिपती
तीज तणो त्योहार लाडली।
प्रीत नीत परतीत परस्पर
रीत तणी रखवार लाडली।
ऊंचो सीस जिहास जिगर में
है सब थारै लार लाडली।[…]

» Read more

सुकवी गजदान सुणावै रे

सब सज्जनां मन होय सौराई, दुष्ट दौराई दूरै।
भेळप-संप रखै सब भाई, प्रेम भलाई पूरै।
(तो) सुकवी गजदान सुणावै रे, चित चारण वो दिन चावै।। 01।।

हर घर माँहीं हेत-हथायाँ, कुटिल मितायाँ कड़खै।
अणहद माण मिलै घर आयाँ, रंच न जायां रड़कै।
(तो) सुकवी गजदान सुणावै रे, चित चारण वो दिन चावै।। 02।।[…]

» Read more

भोर भई अब जाग जीव तू

भोर भई अब जाग जीव तू, आदीतो अम्बर आयो।
अरुण-किरण उठ आभै आई, हर पंछी मन हरसायो।।
चहकत द्वार चारु चिड़कलियां, कलियां चटकत सुख चायो।
गलियां महकत गुल-सोरम सूं, अलिसुत रलियां हित आयो।।
हिमकर उतर तजी असवारी, हिरणी रो मन हरसायो।
दधिसुत खिलत छूटियो अलिसुत, कौमुदसुत मन कुमलायो।।
नव किसलय निरखत सुख निपजै, दरखत-दरखत सरसायो।
सीतल-मन्द-सुगंध समीरण, घर-घर बांटन को आयो।।[…]

» Read more

रीत-नीत तज राड़ करै

रीत-नीत तज राड़ करै,
बाखळ में ऊभ बोबाड़ करै,
परिवार दुखी वां पूतां सूं,
कुळ नै रिगदोळ कबाड़ करै।
सावळ कावळ रो भान नहीं,
कुळ गौरव रो अभिमान नहीं,
लालच रै लपकां लाग्योड़ा,
ऐ गिणै कोई अहसान नहीं।[…]

» Read more

खुद तो खुद सूं साचो बोल

खुद तो खुद सूं साचो बोल
सै सूं पैली खुद नै तोल,
खुद रै मन री घुन्ड्यां खोल,
औरां सूं तो झूठ भलांई
खुद तो खुद सूं साचो बोल।
मन री सगळी घात बता तूं,
प्रतिघाति हालात बता तूं,[…]

» Read more

शहीद प्रभू सिंह राठौड़ नें श्रध्धांजली

अड़यो ओनाड़ वो आतंक सूं सिंवाड़ै
मौद सूं फूल नह कवच मायो।
अमर कर नाम अखियात इण इळा पर
अमरपुर सिधायो चंदजायो।।

प्रभू नै पियारो होयग्यो प्रभुसिंह
सोयग्यो चुका कर कर्ज सारो।
मौयग्यो मरद वो हिन्द री भोम नै
तनक में खोयग्यो चंद-तारो।।[…]

» Read more
1 9 10 11 12