होली के कुछ दोहै

सरहद पर गोली चली, धरती होली लाल|
होली पल पल खेलता,भारत माँ का लाल||१
रे भोली ब्रजबालिका, होली काहै लाल|
होली में ब्रजलाल नें, तन जो मला गुलाल||२
मैं भोली नादान बन,होली उसके साथ|
उसने मौका ताड की,चोली पर बरसात||३
होली वह उसकी सखी!,इस होली के संग|
भोली सी ब्रजगोपिका, रंगी श्याम के रंग|।४ […]

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फागुन के सवैया

गल गुंजनमाल, रू नैन विशाल, चलै गजचाल सदा शुभ जो री।
कटि फेंट धरी मुरली, पटपीत, लिये लकुटी कर में लखियो री।
मुकुटं सिर सुंदर मोरपखा मुख मंजुल चोरत है मति मोरी।
रँग डाल गुलाल अबीर उछाल सखी नँदलाल रचावत होरी।।१।।

बरसे रंग आज सखी ब्रजमें, उर आनंद की सरिता सरसे।
सरसे सब गोपिन के तन के तरू, पल्लव पात नये दरसे।
दरसे दसहू दिस लाल गुलालअबीरन गाल पिया परसे।
परसे हुई आज निहाल अली! ब्रजबाल पे लाल कृपा बरसे।।२।।[…]

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फागुन छाया है सखी

आज बिरज में धूम है, जन जन करे धमाल।
फागुन छाया है सखी!, बरसे लाल गुलाल।।१

गोरी गोरे गाल की, जिसके नैन विशाल।
उससे होली खेलता, नागरिया नंद लाल।।२

सिर पर छोटी बेंदुली, चमके जिसका भाल।
उससे होली खेलता, नागरिया नँदलाल।।३

बातें मिसरी की डली, लगती मोहनथाल।
उससे होली खेलता, नागरिया नंद लाल।।४

आँखें है जादूगरी, नेह नीर के ताल।
उससे होरी खेलता, नागरिया नंद लाल।।५[…]

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केसर भवानी वंदना

।।छंद त्रिभंगी।।
नाकां नथवाळी, कानां बाळी, मां मुकुटाळी कनकाळी।
सिंदूर कपाळी, कंकण वाळी, नेह निहाळी, नयणांळी।
कुम कुम सिर वाळी, लोवडियाळी, ललित लटाळी, रूप उमा।
मरतोली वाळी, लाल धजाळी, तूं ममताळी, चेहर मां।१

माता मतवाली, पीवै प्याली, बासण वाळी बिरदाळी।
डोकर डाढाळी, छिण वपु बाळी, जोबनवाळी, जोराळी।
पातक परजाल़ी, वदी वडाल़ी, नमो निराल़ी, निरमल मां।
मरतोली वाल़ी, लाल धजाल़ी, तूं ममताल़ी, चेहर मां।।२[…]

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करणी माता स्तवन

🌺गीत सोहणौ🌺
सुखदायक नाम मात तौ सगती, दुखदायक पातक दुनिया।
वीसहथी वरदायक वाहर, कुळ जाई मेहा किनिया॥1
संकै मन मत मात सहायक, रंकौ री रिछपाळ रहै।
जस डंकौ उणरौ दुणि बाजै , लोवड री जो ओट लहै॥2

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फागण रा दूहा

तन तो पिव मैं रंग लूं,मन रंगूं किण भाँत|
इण फागण आया नहीं,धणी करी घण घात||१
फागण फूल उछाळतौ,अलबेलौ अणपार|
आयौ मन रे आंगणै,करै प्रेम मनुहार||२
फागण इतरो फाट मत,फूल न मौ पर फैक|
विरहण धण री वेदना,समझ करे सुविवेक||३ […]

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होळी रा रंग

होळी में झोळी भरै, रंगों री अणपार|
सह टोळी फागण सखी,आयौ आपण द्वार||१
साजण तन भल रंग मत ,पण मन रँग दे जोर|
तन रंग मिटसी झीलतां,मन रँग मेटण दोर||२
मन चुनरी मन भावणी,तन री रेशम कोर|
पिचकारी भर प्रेम री,ढोळो मत चितचोर||३ […]

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मायड भाषा ने मिळै

मायड भासा ने मिळे, राज मानता राज।
औ अरजी है आप नें, मेहाई महराज।।७२१
डिंगळ डिगती डोकरी, थां बैठां किण काज।
मायड दीजो मानता, मेहाई महराज।।७२२
डिंगळ री डणकार रा, बोल्या सब कविराज।
मायड दीजो मानता, मेहाई महराज।।७२३
डिंगळ डिगती डोकरी, थारै हाथां लाज।
मायड दीजो मानता, मेहाई महराज।।७२४[…]

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दसमहाविधामयी मेहाई वंदना

धारी सिर जिण धाबळी, कंकण वळे करां ज।
झणण पद शुभ झांझरां, मेहाई महराज।।६८५
माळा फेरत मावडी, मढ बैठ’र रिधुराज।
रात दिवस हिरदै बसो, मेहाई महराज।।६८६
सिंदुर चरचित भाळ शुभ, हेम हार गळ राज।
मालक मां देशांणमढ, मेहाई महराज।।६८७
काळी प्हैरी कांचळी, बिछिया पग रिधु राज।
कर त्रिशूळ किनियांण रे, मेहाई महराज।।६८८[…]

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भुवनेशी कात्यायनी स्तुति का भावानुवाद

भुवनेशी कतियांण री, कविता कथवा काज।
आखर दीजो ओपता, मेहाई महराज।।६३३
भजां मात भुवनेश्वरी, मुकुट चन्द्र सुभ साज।
तनें नमन मां त्रंबका, मेहाई महराज।।६३४
मंद मंद मुख हास ;कर, पाशांकुश वरदा ज।
अभयप्रदा, सोहत उमा, मेहाई महराज।।६३५
देव तवन नित दाखता, गद गद कँठ सूं राज।
किनियाणी करूणाकरा, मेहाई महराज।।६३६[…]

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