गज़ल – जींदगी रा गीत री

जींदगी रा गीत री पंक्ति घणी है|
वां सबां में आध इक म्है गणगणी है|
आज भाल़ी बाट तो औ ठा पडी के,
जिंदगाणी थां बिना लंबी घणी है||
बे विपद रा भाखरां ने काट देवै,
हाथ जिण रे धैर्य री हीराकणी है||
पावतां ही परस निरमल डील होवै,
प्रेम अर प्रियतम उभय पारस मणी है|| […]

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सरस्वती आवाहन

🌸छंद अडिल्ल🌸
विमल देह वाणी ब्रह्माणी,
सादर आव अठै सुर राणी।
लय छंदों री करवा ल्हाणी,
वसौ कंठ मां वीणा पाणी।।१ […]

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सरस्वती वंदना

।।छंद: हरिगीतिका/सारसी।।
शुभ स्वेत वसना, ललित रसना, दडिम-दसना, उज्जवला।
कलहंस करती, फरर फरती, तिमिर हरती, निर्मला।
सिर मुकुट सुंदर, हार गल वर, माल मनहर कर अति।
प्रिय पुस्तपाणि, वाक-वाणी, वीण पाणी, सरसती।।१[…]

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सरस्वती वंदना

मेरे मित्र अवधेश सा देवल से वलदरा में मिलने का हुआ तो उन्होने मुझे सिरोही जिले के ऐतिहासिक पौराणिक सरस्वती मंदिर जो अजारी गांव में स्थित है उसका जिक्र किया और निवेदन किया की आप पर सरस्वती की कृपा है सो सिरोही जिले के अजारी गाँव स्थित सरस्वती मंदिर के अवश्य दर्शन लाभ लें। मैंने उनको बताया था कि हम दोनों साथ साथ चलेंगे और वहां दर्शन करने जाने से पूर्व एक सरस्वती वंदना मेैं मां की बनाने की कोशिश करूंगा। और जब दर्शन करेंगे तो मां के सामने सस्वर पठन करेंगे। आज उस बात को ध्यान में रखते हुए […]

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बिरवडी वंदना

🌹छंद त्रिभंगी🌹
वरदानी वाहर, जोगण जाहर, पूजित हरि हर, अर ब्रह्मा।
नित प्रत चढ नाहर, बैठी भाखर, सुर नर किन्नर, करे खमा।
सुख करूणा सागर, रीझ अमां पर, भाव ह्रदय भर, निरमल मां
बिरवड बिरदाली़, रखौ रूखाल़ी, वीस भुजाली, वंदन मां।। १ […]

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जगमाल के सवैया

मित्र जगमाल सिंह बालुदान जी सुरताणिया को संबोधित संबोधन काव्य

पल़ बीत रही पल ही पल में अब आल़स चारण तू तजरे|
मत सोच करे मन में सुण बांधव है मथ हेक रदं गज रे।
प्रिय मोदक ,पुत्र शिवा ,वरदायक तू गण नायक नें भजरे|
जगमाल !सहायक मूषक वाहक,चारभुजायक तौ कज रे||१ […]

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बिरहण अर बाँसुरी

बिरहण बोदी बाँसुरी,साजण जिण री फूंक।
घर आयां पिव गावसी,कोयल रे ज्यूं कूक।।१
बिनां फूंक री बाँसुरी,बिरहण अर बिन नाह।
ऐ दोन्यूं है एक सी,जीवण नीरस जाह।।२
बजै बिरह री बाँसुरी, अहनिस बिरहण अंग।
जिण रा सुर सुण रीझता,कविता रसिक कुरंग।।३ […]

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डिंगल़

सुंदर मायड भासा डिंगल़।
जीवण री परिभासा डिंगल़।।१
बातां ख्यातां गीत वेलियाँ,
रामत कामड रासा डिंगल़।।२
सूर ,सती संतां री वाणी,
जिण री साँस उछासा डिंगल़।।३
घणी उडीकां अर ओल़ूमय,
रचिया बारहमासा डिंगल़।।४ […]

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पाती लिखतां पीव नें

पाती लिखतां पीव नें, उपजै भाव अनेक।
मन तन री पर मांडवा,आखर मिल़े न एक।।१
पाती लिखणी पीव नें,बात न लागै ठीक।
कीकर भेजूं ओल़भा,दिलबर दिल नजदीक।।२
पाती तो उण नें लिखां,दिल सूं होय जो दूर।
उणने कीकर भेजणी,जो मन-चंदा-नूर।।३ […]

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दो मिसरों का ग्रन्थ

नयन नेह रो मानसर, आँसु फल मुक्ताह|
झुर झुर जीवूं राज कज,हंस आव चुगवाह|

नैण अखाडै नेह री, धुंणीं धखती जोर|
सांझ बपोरां भोर,निरखौ आयर नाथजी||

मन री हूं करस्यूं मढी,तन री धूंणी ताप|
नैण अखाडै नाथ आ,पंड रा मेटौ पाप|| […]

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