सिध्धकुंजिकास्तोत्रम् का भावानुवाद

सिध्धकुंजिका सांतरी, करण सकळ शुभ काज।
गुरुचाबी गढवी तणी, मेहाई महराज।।२७२
चँडी जाप है चारणी, तारण भव जळ मां ज।
अवल नाम आणँद घण, मेहाई महराज।।२७३
कवच अरगला कीलकां, रो सब है मां राज।
रिधू राज राजेस्वरी, मेहाई महराज।।२७४
सुकत ध्यान अर न्यास सब, अरचन वंदन आ ज।
सरस नाम सुखरूप है, मेहाई महराज।।२७५[…]

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कहो केथ हो डोकरी

रण वन गिरवर समदरां,आपूं थनैं अवाज।
कहो केथ हो डोकरी,मेहाई महराज।। २५७
किनियाणी कूकै रियौ,आई सुणौ अवाज।
सुण ! सांची जग री सगत,मेहाई महराज।। २५८
क्यूं बोळी किनियाण ह्वी,जबर फँसी मां जाज।
कूक कूक कायो भयौ,मेहाई महराज।। २५९ […]

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आज आवसी अंबिका

आज आवसी अंबिका, मन मंदिर रे मांझ।
हरखित हुय हुलसित फिरुं, मेहाई महराज।।२४८
आंगण आज बुहारियौ, आवै माजी आज।
जाजम लाल जमायदूं, मेहाई महराज।।२४९
कंचन कळस मंडाय दूं, गंगा जळ भरिया ज।
सामेळो सुंदर करुं, मेहाई महराज।।२५०
ढोली ढोल वजाडता, झालर वेळा आज।
जय जय गूंजै आपरी, मेहाई महराज।।२५१[…]

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बाई पाती बांचजै

जो नँह करणी जनमता, मेहा रे घर मांझ।
उण नें करतो याद कुण, मेहाई महराज।।२३०
बेटी करणी मात बण, जाया कुळ किनिया ज।
अमर पिता जुग जुग कियो, मेहाई महराज।।२३१
भळळळ कुंडळ भळकता, झळळ हार गळ मांझ।
अनुपम आभा आप री, मेहाई महराज।।२३२
लोवड लाल लखावणी, डमरु हाथ लियां ज।
कर कंकण कंचन धर्या, मेहाई महराज।।२३३[…]

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तंत्रोक्त देवी सुक्तम का भावानुवाद

देव नमो देशाणपत, सगती रूप शिवा ज।
प्रणमुं भद्रा प्रकृति, मेहाई महराज।।२००
नित्या रूद्राणी नमूं, गौरी धात्रि मां ज।
ससि रुपा जोसना सुखा, मेहाई महराज।।२०१
कल्याणी वृधि सिध करा, राखस लिछमी राज।
श्री-राजा, शिव सहचरी, मेहाई महराज।।२०२
दुर्गम पार उतारणी, सारां सारण काज।
ख्याति क्रृष्णा धूमवत, मेहाई महराज।।२०३

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करै भळायां काज

जिण नवघण जिमाडियो,बाई दळां बळाज।
वा अनपूरण बिरवडा,मेहाई महराज॥153
भाले नवघण रे भली ,बाई रही बिराज।
सुगनचिडी बण मां स्वयं,मेहाई महराज॥154
भावनगर रा भूप रा,किया मात घण काज।
खोडल मां खुद है स्वयं,मेहाई महराज॥155 […]

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शतक बणे वा सतसई

शतक बणे वा सतसई,ललित लेखणी काज।
सुरसत खुद भेजी स्वयं,मेहाई महराज॥ 105
शतक बणै वा सतसई,उणरी नी परवा ज।
म्है बस चाहूँ बोलणो,मेहाई महराज॥ 106
थळ जळ अर पातळ तथा,अतळ वितळ अधिराज।
सृष्टि सकळ संचालिका,मेहाई महराज॥ 107 […]

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उडै सदा आकास जिम

गुरुवर गणपत औ गिरा,म्हारी थूं सब मां ज।
इणसूं वंदन आपनें,मेहाई महराज॥1
एक रदन अर गज बदन,ह्रदय सदन मँह राज।
आखर लिखणा अंब रा,मेहाई महराज॥2
क्यूं गणपत वंदन करूं,जिणरी पण थूं मां ज।
गौरी रुप गिरिजा स्वयं,मेहाई महराज॥3 […]

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गमियो मूषक राज

गणाध्यक्ष गण राज रो, गमियो मूषक राज।
तद तव मंदिर आविया,मेहाई महराज॥97
कोई उणनें जद कह्यो,मूषक उठै घणाज।
देशाणै रे देवळे,”मेहाई महराज॥98
उछळ कूदता ऊंदरा,गजब देख गणराज।
मन मूंझ्या वां पण कह्यौ,”मेहाई महराज॥”99 […]

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तारा स्वरूपा आवड वंदना

।।शार्दूलवीक्रिडीत छंद।।
अंबा नीलसरस्वती त्रिनयनी, वन्दे शम्शानी परा।।
कैची खप्परणी विशाल खडगा, नीलांम्बुजं धारिणी।
कंठे हार भुजंग व्याल वलया,तन्वी जया तारिणी।
श्रीमद्एकजटाशिरा नमन मां,श्यामा तनु आवडा॥1

ऐं ह्रीं श्रीं शुभ क्लीं हुं उग्र तरला, कापालिका मंगला।
कंकाली नरमुंडमाल धरिणी, शक्ति स्वरूपा भवा।
वामाखेपवशिष्ठ आदिजननीं, हुंकारिणी,चित्परा।
तारा वंदन कालहंती वरदा, मां आवडा शारदा॥2[…]

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