मिनखाजूण रै फळापै अर फुटरापै सारू आपणां बडेरां, संत-साहितकारां अर लोकनीत-व्यवहार रो ज्ञान करावणियां गुणीजणां खास कर इण बात पर जोर दियो है कै आ जीभ जकां रै बस में है, वां रो ई जीवण धन्य है। ‘बाई कैवतां रांड’ कहीजै जकां नैं जस री ठौड़ जूता ई पानै पड़ै। वाणी तो व्यक्तित्व री आरसी मानीजी है। आदमी नीं बोलै जितरै उणरो ठा नीं पड़ै पण जियां ई बोलै उणरो कद आपणै सामी आवणो सरू हुवै। बोली में मिनख रा संस्कार, व्यवहार, ग्यान अर सभाव रो अेकै सागै खुलासो हुवै। आदमी री ठीमरता, धीरज अर संयत व्यवहार री सूचना उणरी वाणी ई दिया करै। जियां ई मिनख बोलै आ ठा पड़ ज्यावै कै ओ कुणसी संगत अर संस्कारां में रैवणियो आदमी है। […]
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