छात्रसंघ-निर्वाचन

नेतृत्व का चयन प्रबंधन,
की प्रामाणिक धूरी है।
कैसे कह दें छात्रसंघ, निर्वाचन गैर जरूरी है।

कोई भी हो तंत्र तंत्र का,
अपना इक अनुशासन है
अनुशासन के लिए तंत्र में
अलग-अलग कुछ आसन है।
आसन पर आसीन कौन हो,
इसकी एक व्यवस्था है।
जहाँ व्यवस्था विकृत-बाधित,
हाल वहीं के खस्ता हैं।
साँप छोड़ बाँबी को पीटे,
समझो अक्ल अधूरी है।
कैसे कह दें छात्रसंघ, निर्वाचन ग़ैर-जरूरी है।[…]

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दादाजी (बालकाव्य)

दादाजी का कमरा जिसमें बच्चे मौज मनाते हैं।
नित्य नई बातें बच्चों को, दादाजी बतलाते हैं।

इक दिन दादाजी ने बोला, आज पहेली पूछूँगा।
जो भी उत्तर बतलाएगा, उसको मैं टॉफी दूँगा।

गणित विषय का ज्ञाता है वो, झटपट जोड़ बताता है।
घर बैठे हमको दुनियां की, सरपट सैर कराता है।
नाम बताओ उसका है जो, टीचर गाईड ओ ट्यूटर।
सारे बच्चे बोल उठे वो, अपना प्यारा कम्प्यूटर।।
वाह बेटा वाह वाह वाह जी, बोल उठे यूँ दादाजी।
हम बच्चों से बातें करके, होते राजी दादाजी।[…]

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दौरेजहाँ का दर्द

ये षड्यंत्री दौर न जाने,
कितना और गिराएगा।
छद्म हितों के खातिर मानव,
क्या क्या खेल रचाएगा।

ना करुणा ना शर्म हया कुछ,
मर्यादा का मान नहीं।
संवेदन से शून्य दिलों में,
सब कुछ है इंसान नहीं।।[…]

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शिक्षक

सोचो उस दिन देश का, होगा कैसा हाल।
शिक्षक ने गर छोड़ दी, नेकनियति की चाल।।

सतयुग से कलियुग तक देखो, ये इतिहास गवाही देता।
शिक्षक हरदम देता रहता, बदले में कब कुछ भी लेता।।

अपने शिष्यों के अंतस में, जिसकी छवि अभिराम है।
ऐसे शिक्षक के चरणों में, कोटि-कोटि प्रणाम है।।

सच को सच कहने की हिम्मत,जो रखता है वह शिक्षक है।
झूठ-कपट से सच्ची नफरत, जो रखता है वह शिक्षक है।।

संस्कारों की फसल उगाता, यह धरती का लाल अनूठा,
पतझड़ में बासंती फितरत, जो रखता है वह शिक्षक है।।[…]

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जाग -जाग रै वोटर जाग!

मतदातावां नै समर्पित
**
जाग-जाग रै वोटर जाग!
सो मत रै भारत रा भाग!!
इतरा वरस आऴस मे़ं खोया!
खोटा मिणिया माऴा पो।
भारत री तकदीर बदऴदे,
वांनै अज तक क्यूं नीं जोया?[…]

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बोधिसत्व री मैत्रीभावना

।।बोधिसत्व री मैत्रीभावना।।

भूखा खाली पेट पकड़ियां,
है सोवण हित मजबूर जका।
तिस मरता पाणी बिन रोवैै,
तड़पैै है बिना कसूर जका।

धीरज छूटण सूं पैली ही,
कछु हाय! इसी जे बण पावै।
प्यासोड़ा ठंडो जळ पीवै,
भूखोड़ा भोजन पा जावै।[…]

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कवि मनुज देपावत का आह्वान

जिसने जन-जन की पीड़ा को,
निज की पीड़ा कर पहचाना।
सदियों के बहते घावों पर,
मरहम करने का प्रण ठाना।
महलों से बढ़कर झौंपड़ियां,
जिसकी चाहत का हार बनी।
संग्राम किया नित सत्ता से,
वो कलम सदा तलवार बनी।[…]

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कोमल है कमजोर नहीं है

कोमल है कमजोर नहीं है,
यह कोई झूठा शौर नहीं है,
अतुलित ताकत है औरत की,
इस ताकत का छोर नहीं है,
कोमल है कमज़ोर नहीं है।

विधना ने वरदान दिया है,
ऊंचा आसन मान दिया है,
सृजना का अधिकार इसे दे,
माँ कह कर सम्मान दिया है।
इसके जैसा और नहीं है।
कोमल है कमज़ोर नहीं है।[…]

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अम्बुद

उर में सुख उपजाए अम्बुद
अमृत-जल बरसाए अम्बुद
वसुधा की सुन अरज गरज कर,
उमड़-घुमड़ कर आए अम्बुद।

सूरज की निर्दयता लख कर
कहती धरती बिलख बिलख कर
सोया कहाँ अरे ओ सुखकर
धरती का सुन राग भाग कर,
छोड़ गगन छिति धाए अम्बुद।[…]

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म्हारी तिणखा इसड़ी राणी

म्हारी तिणखा इसड़ी राणी
(ज्यूं) तातै तवै पडंतो पाणी।

नातो हार-थकेलै वाळो, है कड़वी कैंटीन साथ में।
तणखां रै दिन दांईं नहचै, बिल इणरो आ जाय हाथ में।
उमर, उधारी रीत अेकसी, लीनी जकी पड़ै लौटाणी।।
म्हारी तिणखा इसड़ी राणी
(ज्यूं) तातै तवै पडंतो पाणी।[…]

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