शिक्षक

सोचो उस दिन देश का, होगा कैसा हाल।
शिक्षक ने गर छोड़ दी, नेकनियति की चाल।।

सतयुग से कलियुग तक देखो, ये इतिहास गवाही देता।
शिक्षक हरदम देता रहता, बदले में कब कुछ भी लेता।।

अपने शिष्यों के अंतस में, जिसकी छवि अभिराम है।
ऐसे शिक्षक के चरणों में, कोटि-कोटि प्रणाम है।।

सच को सच कहने की हिम्मत,जो रखता है वह शिक्षक है।
झूठ-कपट से सच्ची नफरत, जो रखता है वह शिक्षक है।।

संस्कारों की फसल उगाता, यह धरती का लाल अनूठा,
पतझड़ में बासंती फितरत, जो रखता है वह शिक्षक है।।[…]

» Read more

जाग -जाग रै वोटर जाग!

मतदातावां नै समर्पित
**
जाग-जाग रै वोटर जाग!
सो मत रै भारत रा भाग!!
इतरा वरस आऴस मे़ं खोया!
खोटा मिणिया माऴा पो।
भारत री तकदीर बदऴदे,
वांनै अज तक क्यूं नीं जोया?[…]

» Read more

बोधिसत्व री मैत्रीभावना

।।बोधिसत्व री मैत्रीभावना।।

भूखा खाली पेट पकड़ियां,
है सोवण हित मजबूर जका।
तिस मरता पाणी बिन रोवैै,
तड़पैै है बिना कसूर जका।

धीरज छूटण सूं पैली ही,
कछु हाय! इसी जे बण पावै।
प्यासोड़ा ठंडो जळ पीवै,
भूखोड़ा भोजन पा जावै।[…]

» Read more

कवि मनुज देपावत का आह्वान

जिसने जन-जन की पीड़ा को,
निज की पीड़ा कर पहचाना।
सदियों के बहते घावों पर,
मरहम करने का प्रण ठाना।
महलों से बढ़कर झौंपड़ियां,
जिसकी चाहत का हार बनी।
संग्राम किया नित सत्ता से,
वो कलम सदा तलवार बनी।[…]

» Read more

कोमल है कमजोर नहीं है

कोमल है कमजोर नहीं है,
यह कोई झूठा शौर नहीं है,
अतुलित ताकत है औरत की,
इस ताकत का छोर नहीं है,
कोमल है कमज़ोर नहीं है।

विधना ने वरदान दिया है,
ऊंचा आसन मान दिया है,
सृजना का अधिकार इसे दे,
माँ कह कर सम्मान दिया है।
इसके जैसा और नहीं है।
कोमल है कमज़ोर नहीं है।[…]

» Read more

अम्बुद

उर में सुख उपजाए अम्बुद
अमृत-जल बरसाए अम्बुद
वसुधा की सुन अरज गरज कर,
उमड़-घुमड़ कर आए अम्बुद।

सूरज की निर्दयता लख कर
कहती धरती बिलख बिलख कर
सोया कहाँ अरे ओ सुखकर
धरती का सुन राग भाग कर,
छोड़ गगन छिति धाए अम्बुद।[…]

» Read more

म्हारी तिणखा इसड़ी राणी

म्हारी तिणखा इसड़ी राणी
(ज्यूं) तातै तवै पडंतो पाणी।

नातो हार-थकेलै वाळो, है कड़वी कैंटीन साथ में।
तणखां रै दिन दांईं नहचै, बिल इणरो आ जाय हाथ में।
उमर, उधारी रीत अेकसी, लीनी जकी पड़ै लौटाणी।।
म्हारी तिणखा इसड़ी राणी
(ज्यूं) तातै तवै पडंतो पाणी।[…]

» Read more

विश्वासां रै गळै कटारी

जूत्यां में पगथळियां वांरी, कियां कटाणी, आ सीखां।
विश्वासां रै गळै कटारी, कियां चलाणी, आ सीखां।

लज्जा रै चिळतै लूगडि़यै, पैबंदां रै जाळ फंसेड़ी।
(इण) कारी वाळी नैं महतारी, नहीं बताणी, आ सीखां।[…]

» Read more

काश हम भी प्रताप बने होते – “रुचिर”

मुझसे उसने पूछा होता,
मैं मस्तक पर तिलक लगाती।
घोड़ी पर बिठलाकर उसका,
चुम्बन लेती विदा कराती।
पर वह स्वतन्त्रता का राही माँ से चुप चुप चला गया।
बिन पूछे ही चला गया।।[…]

» Read more
1 4 5 6 7 8 12