हे गाँव, तुझे मैं छोड़ चला

था एक दिवस जब तेरे इस आँगन में फूली अमराई !
था एक दिवस जब मेरे भी मन में झूमी थी तरुणाई !
पीपल की फुनगी पर बोली, पंचम स्वर में कोयल काली !
मादक मधु-ऋतु के स्वागत में, कोसों तक फैली हरियाली !
पावस की मतवाली संध्या, आती अम्बर से उतर-उतर !
उन खेतों की पगडंडी पर, वह बैलों की घंटी का स्वर ![…]

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मनवा मत कर बेड़ी बात

मनवा मत कर बेड़ी बात, बात में नाथ बिसर जासी।
नाथ बिसर जासी, हाथ सूं हेम फिसळ जासी।।टेक।।

हर सुमरण करतां हेताळू, (वो) संकट-टाळू साथ।
प्रतख एक वो ही प्रतपाळू, दीनदयाळू नाथ।।01।।
मनवा मत कर….

धीज पतीज धणी वो देसी, रीझ घणी रघुनाथ।
बिगड़ी बात स्यात में बणसी, साची कथ साख्यात।।02।।
मनवा मत कर—–[…]

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रे धोरां आळा देस जाग

धोराँ आळा देस जाग रे ऊँटाँ आळा देस जाग।
छाती पर पैणा पड़्या नाग रे धोराँ आळा देस जाग।।

उठ खोल उनींदी आँखड़ल्यां नैणाँ री मीठी नींद तोड़।
रे रात नहीं अब दिन ऊग्यो सपनाँ रो कू़डो मोह छोड़।।
थारी आँख्याँ में नाच रह्या जंजाळ सुहाणी रातां रा।
तूं कोट बणावै उण जूनोड़ै जुग री बोदी बातां रा।।
रे बीत गयो सो गयो बीत तूं उणरी कू़डी आस त्याग।।
छाती पर पैणा पड़्या नाग रे धोराँ आळा देश जाग।।१।।[…]

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सत पथ

हर इक मोड़ गली चौराहे, रावण का ही राज यहां।
विध-विध रूपाकारी दानव, है जिनके सिर ताज यहां।
राम नाम तो यहां समझलो, लाचारी का सौदा है।
ईमान-धर्म इन सबसे बढ़कर, या पैसा या ओहदा है।
कलयुग पखी राह रावण की, जिन भरमाए भले-भले।
उस पथ पर चलना अति मुश्किल,जिस पर श्री रघुनाथ चले।

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हम भारत के युवा

विश्वधरा पर ज्ञानदेव के सबसे बड़े पुजारी हैं।
हम भारत के युवा हमारी, मेधा सब पर भारी है।।

सागर से गहराई सीखी, हिमगिरि से दृढताई सीखी।
नदियों से हिलमिल कर चलना, फूलों से तरुणाई सीखी।
तारों से मुस्कान, दीप स,े कर्म दृष्टि उद्दात मिली है।
भारत भू के इक-इक कण से, साहस की सौगात मिली है।
वीर शिवा के वंशज हैं हम, शक्ति शौर्य हमारी है।
हम भारत के युवा हमारी, मेधा सब पर भारी है।।[…]

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किणनैं दरद सुणाऊं कान्हां

किणनैं दरद सुणाऊं कान्हां, किण आगळ फरियाद करूं।
कुणसै कांधै सिर धर रोऊं, कह दै किणनैं याद करूं।।
किणनैं दरद सुणाऊं कान्हां…………।।

बूढापै री लाठ्यां म्हांरी, अेक नहीं है तीन मुरारी।
जाझै जतनां करी करारी, तीनां री शोभा हद भारी।
तीनूं तेल पियोड़ी ताजी, जिणरै हाथ लगै सो राजी।
रिच्छा राड़ दोनां में रूड़ी, कोनी म्हारी आ कथ कूड़ी।
पण म्हारै हित आज माधवा, परतख तीनूं तीन पराई।
हाथ घालतां फांस गड़ै है, खपत करंतां खाल बचाई।
सांस-सांस रै संग सांवरा, सुबक-सुबक कर साद करूं।
किणनैं दरद सुणाऊं कान्हां…………।।[…]

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अपने चारों धाम खेत में

तीर्थ-स्नान तमाम खेत में।
अपने चारों धाम खेत में।।

श्रम की पूजा सांझ-सकारे।
और न दूजा देव हमारे।
जस उसका उसके जयकारे।
सच्चे सात सलाम खेत में।
अपने चारों धाम खेत में।।[…]

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सुनो सपूत हिंद के

सुनो सपूत हिंद के! सुपुत्रियो सुनो ज़रा!
सुनो तुम्हें पुकारती, ये मादरे वसुंधरा!
मनु के आत्मजो सुनो! सुनो आदम के अंशजो!
गुरु-ग्रंथ पूजको सुनो! सुनो यीशु के वंशजो!
जिनेन्द्र जैनियो सुनो! प्रबुद्ध बुद्ध अर्चको!
सुनो सुकर्म साधको! विशुद्ध ज्ञान चर्चको![…]

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विचार अर संसार

गीली माटी मांय प्रजापत, सूखी ल्याय मिलाई।
नीर मिला रौंदण जद लाग्यो, माटी तद मुस्काई।।

बोली अरे! कुंभकार क्यूं, बर-बर और मिलावै।
रौंदी उणनैं राम सिंवर कर, क्यूं नीं चाक चढ़ावै।।

कुंभकार बोल्यो सुण माटी, आज इसी मन आई।
चिलम बणाणी छोड़ चाव सूं, घड़स्यूं अबै सुराई।।

माटी भाग सरावत बोली, करी भली करतार।
तोर विचार बदळतां म्हारो, बदळ् गयो संसार।।[…]

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चकवी अर चकवो

अेक रात री बात बताऊं,
सुणी जकी सागण समझाऊं।
चकवो चकवी बोलण लाग्या,
रात अंधारो तोलण लाग्या।
पीपळ पर चकवी रो बासो,
चकवै रो बड़ अळगो खासो।
बातां करता टेम बितावै,
इतरै में आंधी आ ज्यावै।
चकवी रो मन डरपण लागै,
डरती बड़लै कानी भागै।[…]

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